गतिविधियाँ

धर्म यात्राओं की अनूठी पहल

yatra 0काशी में धर्म लोगों का अभिन्न अंग रहा है। प्रातःकाल का आगमन यहां घण्टा-घड़ियालों वैदिक मन्त्रों के सुमधुर स्वर एवं हवन सामग्रियों की सुगन्ध के साथ होता है। काशी से जुड़ा एक कर्म यात्रा का भी है। हिन्दुओं के लिए धार्मिक यात्राओं का अपना महत्व रहा है। यात्राओं की बात की जाय तो काशी में इतनी यात्राएँ होती है कि वर्ष भर इनका क्रम चलता रहता है। धार्मिक यात्रा करने के पीछे का आशय कई अर्थों में है किन्तु सामान्य आशय यह रहा है कि यात्रा के दौरान मन एवं शरीर सात्विक हो जाय और भक्ति में रम जाये। धार्मिक यात्रा के दौरान यात्री कई तरीके से नियमबद्ध हो जाते हैं। साथ ही कई अवगुणों को यात्रा के दौरान छोड़ना पड़ता है। खान-पान पूरी तरह सात्विक हो जाता है। जब तक यात्रा चलती रहती है यात्री का मन पूरी तरह से भक्तिमय हो जाता है। इस दौरान लोग कई तरह के संकल्प से भी बंध जाते है। धार्मिक यात्राओं में कुछ नियम भी बनाये गये हैं यात्रियों से इन नियमों के पालन की अपेक्षा रहती है। आत्म नियंत्रण के लिए बनाये गये इन नियमों में प्रमुख रूप से यात्रा काल में राजसी एवं तामसी आचार-विचार का तिरस्कार कर दिया जाय। काशी की यात्राओं में सबसे प्रमुख यात्रा पंचक्रोशी है जिसे आस्थावान करते रहे हैं। इसके अतिरिक्त कई और धार्मिक यात्राएँ भी होती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार तो काशी में रहकर हर दिन पतित पावनी गंगा एवं काशी विश्वनाथ की यात्रा करनी चाहिए। अभी भी कुछ धार्मिक प्रवृत्ति के श्रद्धालु इस नियम का पालन करते हैं। गंगा स्नान के बाद काशी विश्वनाथ का दर्शन करने को एकायतन यात्रा कहा जाता है। काशी की अन्य यात्राएँ भी महत्वपूर्ण है जैसे द्विरायतन की यात्रा त्रियातन की यात्रा चतुरायतन यात्रा के अलावा भी कई यात्राएँ होती हैं। रुद्र प्रताप गौतम जी ने अपनी पुस्तक “काशी यात्रा” में लिखा है कि मुगल शासकों की प्रतिशोधपूर्ण नीति के कारण अनेक यात्रा बन्द हो गयी और लुप्त हो गयी थी। वर्तमान में काशी में कई धार्मिक यात्राएँ होती है और इन यात्राओं को बनाये रखने में एक बड़ा प्रयास कर रही है ‘काशी प्रदक्षिणा दर्शन यात्रा समिति’। समिति द्वारा वर्षभर में लगभग 16 बड़ी यात्राओं का आयोजन तथा अन्य छोटी यात्राओं का आयोजन किया जाता है। काशी पदक्षिणा समिति के यात्रा संचालक उमाशंकर गुप्ता ने समिति के उद्देश्यों तथा कार्यों के सम्बन्ध में पूछने पर बताया कि काशी प्रदक्षिणा समिति की स्थापना के पीछे उद्देश्य यह था कि काशी के बारे में, यहाँ की यात्रा, स्कन्द पुराण में वर्णित काशी खण्डोक्त में स्थित सभी मन्दिरों की लोगों को जानकारी मिले, लुप्त होती धार्मिक यात्राओं को पुनर्जीवन मिले, साथ ही यात्रा कराने के पीछे एक उद्देश्य पुण्य कर्म भी है। श्री गुप्त ने बताया कि पहले यात्रा संचालन का कर्म उनके पिता श्री कन्हैयालाल गुप्ता के द्वारा शुरू हुई थी। पिता जी कागज पर मन्दिरों का नाम लिखकर आगे-आगे चलते तथा पीछे के लोगों का मार्ग दर्शन करते। सन् 1999 से उमाशंकर गुप्ता ने भी यात्रा संचालन का कार्य प्रारम्भ किया। सन् 2001 में श्री दण्डी स्वामी शिवानन्द सरस्वती जी महाराज की अध्यक्षता में काशी प्रदक्षिणा दर्शन यात्रा समिति का पंजीकरण हुआ और समिति द्वारा प्रदक्षिणा का यह सार्थक पहल अनवरत जारी है। यात्रा संचालक उमाशंकर गुप्ता द्वारा वर्षभर का यात्राओं का विवरण पहले से ही तैयार कर एक सूची बना ली जाती है तथा शहर के प्रमुख स्थानों पर वितरित की जाती है ताकि अधिक से अधिक तीर्थ यात्रियों तथा इच्छुकों तक जानकारी पहुंच सके। इस प्रकार उमाशंकर गुप्ता द्वारा पैदल यात्रा, वाहन यात्रा तथा बोट यात्रा का आयोजन किया जाता है। इतने सार्थक प्रयासों के बावजूद श्री गुप्ता यात्रियों से किसी भी प्रकार शुल्क नहीं लेते। वाहन यात्रा में यात्री वाहन खर्च स्वयं वहन करते हैं। साथ ही खान-पान का खर्च भी। श्री गुप्ता द्वारा किये जाने वाले इस काशी प्रदक्षिणा दर्शन कार्यक्रम में ना सिर्फ काशीवासी बल्कि अन्य राज्यों के यात्री भी आते हैं तथा काशी में यात्रा सम्बन्धी सहायता प्राप्त करते हैं और श्री गुप्ता सहज-सेवाभाव से उपलब्ध रहते हैं। उमाशंकर गुप्ता को काशी यात्रा के दौरान इतनी गहन जानकारी प्राप्त हो गई कि श्री गुप्ता द्वारा शोधकर्ताओं, विदेशी छात्र, छात्रा शोधकर्ताओं को सहयोग दिया गया है। जिससे अभिभूत थे शोधार्थी अपने शोध पत्र व पुस्तकों में उनका उल्लेख करना नहीं भूले हैं। यात्रा संचालन में आने वाली कठानाईयों के सम्बन्ध में श्री गुप्ता ने बताया कि समिति के ज्यादातर सदस्य अब सक्रिय नहीं है उन्हें अकेले ही यह कार्य करना पड़ रहा। श्री गुप्ता के यात्रा को लेकर सुरक्षा कारणों से सम्बन्धित व्यौरा भी स्प्न् तथा खुफिया विभाग और थानों को देनी पड़ती है। इसके लिए उन्होंने बकायदा एक रजिस्टर बना रखा है और 1999 से लेकर अभी तक हुई सभी यात्राओं के विवरण, यात्रियों के नाम पते तक सभी आंकड़े सुरक्षित रखे हैं। अन्य कठिनाईयों में यात्रियों के संग भाषा सम्बन्धी दिक्कतें भी होती हैं कभी-कभी वाहन यात्रा में यात्री नाम लिखवाकर नहीं आते जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी सहना पड़ता है। इन सब कठिनाईयों के बावजूद श्री गुप्ता अपनी प्राईवेट नौकरी से समय निकालकर यात्राओं का आयोजन करते हैं तथा इस कलियुग में कई यात्रियों के लिए श्रवण कुमार बनते हैं। श्री गुप्ता ने बताया कि वृहद चौरासी क्रोशी एवं पंचक्रोशी यात्रा के अलावा काशीखण्ड में वर्णित पांच अंर्तगृही यात्रा भी प्रमुख है जिसके मुख्य रूप से केदारखण्ड की यात्रा, विश्वनाथ खण्ड, ओंकारेश्वर खण्ड की यात्रा प्रमुख है। साथ ही त्रिशूल यात्रा, तुलसीदास जी द्वारा स्थापित 11 रुद्र हनुमान मंदिर यात्रा का संचालन किया जाता है। यात्रा को करने के उद्देश्य पर उमाशंकर गुप्ता ने सहज भाव से कहा कि इससे उन्हें पुण्य तो मिलता है साथ ही अपार संतुष्टि मिलती है। कब किस रूप में कौन आ सामने आ जायेगा कोई नहीं जानता बस सेवाभाव से कर्म करना चाहिए। श्री गुप्ता ने 2031 तक शहर के मास्टर प्लान पर भी खुशी जताई जिसमें पंचक्रोशी क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से संवारने की बात कही गई है। इससे पर्यटन तो बढ़ेगा ही साथ ही यात्रियों को भी सुविधा होगी।

काशी प्रदक्षिणा दर्शन यात्रा समिति द्वारा प्रतिवर्ष कराये जाने वाले यात्रा का विवरण (वर्षवार तिथि एवं साधनों में परिवर्तन सम्भव)

1. एक दिवसीय नव दुर्गा व नव गौरी प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा-रविवार 06-04-2014 प्रातः 8:00 बजे दुर्गा मन्दिर दुर्गाकुण्ड से।

2. काशी में सप्तीर्थी स्नान, ध्यान, दर्शन-पूजन यात्रा-रविवार-04-05-2014 प्रातः 8:00 अस्सी घाट से मोटर वोट द्वारा

3. काशी विश्वनाथ कलश यात्रा – सोमवार 09-06-2014 प्रातः 7:00 बजे-राजेन्द्र प्रसाद घाट (सुप्रभातम्-द्वारा)

4. काशी में (56) छप्पन विनायक (गणेश) प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा-रविवार से शनिवार (सात-दिन)- 29-06-2014 से 05-07-2014 तक प्रतिदिन प्रातः 8:00 बजे

5. केदार खण्ड अर्न्तगृही प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा-रविवार 13-07-2014 प्रातः 8:00 बजे केदार घाट से

6. काशी में द्वादश ज्योर्तिलिंग प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा-रविवार 20-07-2014 प्रातः 8:00 बजे केदार घाट से

7. काशी की त्रिशूल यात्रा (वाहन द्वारा)-रविवार 27-07-2014 प्रातः 8:00 बजे डुमरॉव बाग कालोनी अस्सी से

8. काशी में एकादश महारुद्र लिंग प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा-रविवार 03-8-2014 प्रातः 8:00 बजे दुर्गा मन्दिर (दुर्गाकुण्ड से)

9. काशी के बैजनाथ धाम में जलाभिषेक यात्रा-(दोपहर) सोमवार 04-08-2014 दोपहर 2:00 बजे अस्सी-घाट से

10. काशी में द्वादश आदित्य (सूर्य) प्रदक्षिणा दर्शन – पूजन यात्रा – (महारविवार) दि0 07-09-2014 प्रातः 8:00 बजे लोलार्क कुण्ड (भदैनी) से

11. पितरों की मुक्ति हेतु स्नान, ध्यान, तर्पण दर्शन-पूजन यात्रा-रविवार 21-09-2014 प्रातः 9:00 बजे प्रयागघाट से

12. एक दिवसीय नव दुर्गा व नव गौरी प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा-रविवार 28-09- 2014 प्रातः 8:00 बजे दुर्गा मन्दिर (दुर्गाकुण्ड से)

13. काशी में षोडश विष्णु प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा-रविवार 02-11-2014 प्रातः 8:30 बजे प्रयाग घाट (दशाश्वमेध घाट)

14. काशी के अष्ट (प्रधान) भैरव प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा-शुक्रवार(कालभैरवाष्टमी) 14-11-2014 दोपहर 2:30 बजे दुर्गाकुण्ड मन्दिर (दुर्गाकुण्ड से)

15. काशी में सप्तऋर्षि प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा-रविवार 23-11-2014 प्रातः 9:00बजे जंगमबाड़ी मठ के पास से

16. काशी में नव ग्रह प्रदक्षिणा दर्शन-पूजन यात्रा-रविवार 30-11-2014 प्रातः 9:00 बजे मंगला गौरी मन्दिर से (दुर्गाघाट) से

(काशी के विभिन्न यात्राओं के इच्छुक श्रद्धालु यात्रा संचालक व सूचना मंत्री श्री उमा शंकर गुप्ता जी से सम्पर्क कर सकते हैं – बी0 1/96, डुमराँव बाग कालोनी, अस्सी-वाराणसी-05 दूरभाष : 09336848739)

* अरविन्द कुमार मिश्रा

 

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