तीर्थ स्थल

वाराणसी के सुविख्यात देवायतनों तथा तीर्थों का स्थाननिर्देश

 1. अक्रूरेश्वर – भदैनी के समीप अक्रूर-घाट पर।

2. अग्निजिह्व वेताल वृद्धकाल के पास मकान नं0 K 52/32 में शिवलिंग।

3. अग्निजिह्व वेतालकुण्ड– वहीं पर लुप्त।

4. अग्नितीर्थ – अग्नीश्वर घाट पर।

5. अग्नीश्वर अग्नीश्वर-घाट के ऊपर गली में मकान नं0 CK 2/3 में। प्राचीन स्थान स्वर्लीनेश्वर के समीप मकान नं0 A 12/2 में भी वर्तमान।

6. अग्नीश्वरकुण्ड – ईश्वरगंगी तालाब की वर्तमान मान्यता।

7. अग्नीश्वर दीर्घिका – वर्तमान नाम डिघियागड़ही। अब लुप्तप्राय।

8. अग्नीश्वर द्वितीय (आग्नीध्रेश्वर) – जागेश्वर नाम से प्रसिद्ध नरहरिपुरा में K 66/4 में.

9. अगस्त्य कुण्ड अगस्त्यकुण्डा मुहल्ले में प्रतीक-रूप से।

10. अगस्त्य तीर्थ चौंसट्ठी घाट के सामने गंगा जी में।

11. अगस्त्येश्वर अगस्त्यकुण्डा मुहल्ले में मकान नं0 D 36/11 में।

12. अघोरेशी कामेश्वर के समीप मकान नं0 A 2/21 के सामने पेड़ के नीचे छोटी मढ़ी में।

13. अघोरोद कूप ओंकारेश्वर के ईशानकोण में।

14. अत्युग्र नरसिंह कलशेश्वर के पश्चिम गोमठ में मकान नं0 CK 8/21

15. अनारकहृद (अमरकहृद-कृ0क0त0) – अमरैया तालाब, लाट भैरव के समीप।

16. अनारकेश्वर (अमरकेश्वर) – वहीं पर, अब लुप्त।

17. अप्सरस कूप – देखिये गौरीकूप।

18. अप्सरसेश्वर – ज्ञानवापी मस्जिद की सीढ़ियों के सामने खिड़की में छोटा शिवलिंग।

19. अभयद विनायक दशाश्वमेध पर शूलटंकेश्वर के मन्दिर में मकान नं0 D 17/111 के नीचे।

20. अमृतेश्वर – स्वर्गद्वारी पर मकान नं0 C 33/28 में नीचे वाला शिवलिंग।

21. अमृतेश्वरी – वहीं पर कुंए के ऊपर।

22. अम्बिका गौरी – रत्नेश्वर के पास मकान नं0 K 53/38 में लुप्त।

23. अम्बिकेश्वर वहीं, वर्तमान मानकेश्वर।

24. अम्बरीषेश्वर – केदार मन्दिर में, अब लुप्त।

25. अमरेश्वर – लोलार्क के पास नं0 B 2/20 में।

26. अयोगन्धकुण्ड पुष्कर नाम से प्रसिद्ध। पहले ओंकार क्षेत्र में, अब मुमुक्ष भवन के सामने।

27. अयोगन्धेश्वर – वहीं।

28. अर्कविनायक लोलार्क के समीप घाट के ऊपर मकान नं0 B 2/17 के सामने।

29. अरुणादित्य – त्रिलोचन मन्दिर में।

30. अरुन्धतीतीर्थ – चौसट्ठी घाट के उत्तर में गंगा जी में।

31. अवधूत तीर्थ पशुपतीश्वर के पश्चिम। इसी कुण्ड को पाटकर पशुपतीश्वर मुहल्ला बसा है। इसका पश्चिमी तट वर्तमान लाजपत नगर रोड के समीप था।

32. अवधूतेश्वर – पशुपतीश्वर मन्दिर के सामने के नं0 CK 13/85 में। वहीं पर अवधूत तीर्थ का प्रतीक कुण्ड भी है।

33. अविमुक्त विनायक – विश्वनाथ मंदिर में नैत्रैऋत्यकोण के छोटे मन्दिर में गौरी तथा विष्णु के समीप।

34. अविमुक्तेश्वर – वाराणसी का सबसे पुनीत शिवलिंग। इस समय दो मन्दिर हैं, एक तो विश्वनाथ जी के घेरे में आग्नेय कोण का छोटा मन्दिर और दूसरा – ज्ञानवापी मस्जिद की सीढ़ियों के सामने खिड़की में बड़ा शिवलिंग।

35. अविमुक्तेश्वर तीर्थ – मणिकर्णिका घाट के समीप गंगा जी में।

36. अशोक तीर्थ – इसका दूसरा नाम विलोक तीर्थ था, जो भरने पर विलोकनाल हुआ, जिसका अपभ्रंश बुलानाला हुआ। इसको पाटकर बुलानाला मुहल्ला बसा।

37. अश्वारूढ़ा – बागेश्वरी के मन्दिर में चौक में आले पर। जैतपुरा मुहल्ला मकान नं0 J 6/33 में।

38. असितांग भैरव – वृद्धकाल के घेरे में सर्वेश्वर मन्दिर की दीवार में। मकान-नं0 K 52/39 में।

39. अस्थिक्षेपतड़ाग – बेनिया पार्क के तालाब का वह अंश जिसे पाटकर हड़हा मुहल्ला बसा।

40. असिसंमेद तीर्थ – अस्सी संगम। लोक प्रसिद्ध।

41. अत्रीश्वर – नारद घाट के समीप मकान नं0 D 25/11 में पहला स्थान गोकर्ण के समीप, लुप्त।

42. आदिकेशव – वरूण-संगम के समीप, लोक प्रसिद्ध।

43. आदित्यकेशव – आदिकेशव के पास, अब लुप्त।

44. आदित्यकेशव तीर्थ – आम्बरीष तीर्थ तथा दत्तात्रेयेश्वर तीर्थ के बीच में। आदिकेशव के समीप गंगा जी में।

45. आनुसूयश्वर – वर्तमान स्थान नारदघाट के ऊपर मकान नं0 D 25/11 में।

46. आपस्तंबेश्वर – 1- एक बूढे़ बाबा के नाम से प्रसिद्ध। मकान नं0 K 53/116 के सामने मध्यमेश्वर मुहल्ले में। 2- मध्यमेश्वर के दक्षिण के शिवालय में बड़ा शिवलिंग।

47. आम्बरीष तीर्थ – आदिकेशव के समीप गंगा जी में।

48. आमर्दकेश्वर – (1) काठ की हवेली के पीछे मकान-नं0 K 30/4 में कालमाधव के सामने। (2) समीप में ही मकान नं0 32/33 में कालामर्दनेश्वर नाम से।

49. आम्नातकेश्वर – जैतपुरा में सिद्धेश्वर के समीप म0 नं0 J 6/84 में।

50. आशापुरी देवी – मैदागिन तालाब के उत्तर मकान नं0 K 59/16 में मैदागिन बगीचे से सटी हुई।

51. आशाविनायक – मीरघाट पर महावीरजी के मन्दिर में मकान नं0 D 3/79 में।

52. अश्विनेयेश्वरौ मंगामहल के पास मकान नं0 CK 2/26 में।

53. आषाढ़ीश्वर – दो स्थान है। एक रानी बेतिया के मन्दिर के पास काशीपुरा में, दूसरा भारतभूतेश्वर के मकान नं0 CK 54/24 में।

54. इन्द्रद्युम्न तीर्थ – रामघाट से मिला हुआ गंगा जी का भाग उत्तर की ओर।

55. इन्द्रद्युम्नेश्वर वहीं।

56. इन्द्रश्वर (प्रथम) – मणिकर्णिका घाट पर तारकेश्वर के समीप।

57. इन्द्रेश्वर (द्वितीय) – कर्कोटक वापी (नागकुँआ) के उत्तर अब लुप्त। सन् 1822 ई0 तक वहाँ इन्द्रेश्वर-कुण्ड था। अब वह भी लुप्त।

58. इन्द्रेश्वर कुण्ड – तारा कुँआ के पास गड़हा, जो अब भर गया है।

59. इक्ष्वाकुतीर्थ रामघाट के दक्षिण मिला हुआ गंगाजी में।

60. ईशान तीर्थ – रामघाट के दक्षिण मिला हुआ गंगाजी में।

61. ईशान तीर्थ – मर्णिकर्णिका तथा ललिताघाट के बीच के 13 तीर्थों में से सातवां तीर्थ।

62. ईशानेश्वर प्रथम – बांसफाटक सिनेमा के उत्तर की गली में। मकान-नं0 CK 37/43 में।

63. ईशानेश्वर द्वितीय – प्रह्लादघाट पर दानेश्वर नाम से प्रसिद्ध।

64. उग्रलिंग – लोलार्क के समीप।

65. उग्रेश्वर – पहले ओंकार क्षेत्र में। अब लक्ष्मीकुण्ड पर।

66. उटजेश्वर – दीनानाथ के गोला में।

67. उतथ्यवामदेव – मणिकर्णिश्वर के उत्तर सम्भवतः सिंधियाघाट के ऊपर वशिष्ठ वामदेव मन्दिर में।

68. उत्तरार्क अलईपुरा में बकरिया कुण्ड के समीप लुप्त, बकरिया कुण्ड उत्तरार्क कुण्ड ही है।

69. उद्दालकतीर्थ – राजघाट से कुछ पूर्व गंगा जी में।

70. उद्दण्ड मुण्ड विनायक – त्रिलोचन महादेव के घेरे में वाराणसी देवी के समीप।

71. उद्दण्ड विनायक – पंचकोशी में रामेश्वर के पास भुइली गांव में।

72. उन्मत्त भैरव – पंचकोशी के रास्ते देउरा गांव में।

73. उपशांत शिव – पहले भदऊँ मुहल्ले में। अब अग्नीश्वर के पास मकान नं0 CK  2/4 में।

74. उमातीर्थ – मणिकर्णिका घाट पर चक्रपुष्करिणी के उत्तर सटा हुआ गंगाजी में। ऊपर उमा देवी मकान न0 CK 7/102 में अम्बादेवी नाम से प्रसिद्ध।

75. उर्वशीकुण्ड – औसानगंज में बाबू शिवनारायण सिंह के मन्दिर के उत्तर। अब पट गया।

76. उर्वशीश्वर – बाबू शिवनारायण सिंह के मन्दिर में पीपल के नीचे। मकान नं0 J 56/108 में।

77. उर्ध्वरेता कुष्माण्डविनायक के समीप फुलवरिया गांव में।

78. ऋणमोचन तीर्थ – लड्डू गड़हा। (ओइम्कारेश्वर के उत्तर में)।

79. ऋष्यश्रृंगेश्वर – लक्ष्मीकुण्ड पर काली मठ में लुप्त। श्रृंगी ऋषि की मूर्ति वर्तमान। मकान-नं0 D 52/35.

80. एकदन्त विनायक – (1) बंगाली टोला में पुष्पदन्तेश्वर के पास। पहले सम्भवतः कुछ और दक्षिण। (2) पुनः स्थापना संकठाजी की दक्षिण दीवार में वैरोचनेश्वर के पास।

81. ऐरावत कुण्ड – वृद्धकाल के आग्नेयकोण में सन् 1825 ई0 तक था, अब लुप्त।

82. ऐश्वर्येश्वर – कचौड़ी गली में मकान नं0 K 34/60 में दुर्मुख विनायक के सम्मुख।

83. ओमकारेश्वर – मच्छोदरी के उत्तर पठानीटोला के पास हुक्कालेसर अकांरेश्वर (ओमकारेश्वर का अपभ्रंश) मुहल्ले में टीले के ऊपर उकारेश्वर प्रसिद्ध। पहले यहाँ पाँच मन्दिर थे, जिनको पंचओमकारेश्वर कहते थे। अब केवल तीन हैं। अकारेश्वर A 33/25 में, मकारेश्वर A 33/47 में तथा नादेश्वर अथवा ओमकारेश्वर A 33/23 में टीले के ऊपर। उकारेश्वर तथा बिन्दु लुप्त हो गये हैं।

84. अंगारक तीर्थ – अग्नीश्वर घाट से मिला हुआ दक्षिण में गंगाजी में।

85. अंगारेश्वर प्रथम – आत्मावीरेश्वर के मन्दिर के दालान में। मकान-नं0 CK 7/158.

86. अंगारेश्वर द्वितीय – ऋणमोचन के दक्षिण अब लुप्त।

87. अंगारेश्वरकुण्ड – ऋणमोचन के पास। लुप्त।

88. अंगारेश्वर तृतीय – मुकुट कुण्ड के समीप। लुप्त।

89. अंगारेशी चण्डी – (1) मुकुट-कुण्ड पर पंचकौड़ी देवी के नाम से वर्तमान स्थान मकान नं0 B 27/20। (2) कामाक्षा पर अनजानी देवी के नाम से।

90. अंगिरसेश्वर – (1) जंगमबाड़ी में मकान नं0 D 35/77 में (2) स्वर्गद्वारी में मकान-नं0 CK 10/16 में।

91. अंतकेश्वर – वृद्धकाल के घेरे में। मकान-नं0 K 52/39.

92. कचेश्वर – शुक्रेश्वर-मन्दिर का छोटा शिवलिंग, मकान-नं0 D 8/30.

93. कपर्दी विनायक – पिशाचमोचन पर। मकान-नं0 C 21/40.

94. कपालमोचन तीर्थ – ओमकारेश्वर के टीले के ठीक पश्चिम मिला हुआ तालाब, जिसको रानी-भवानी ने पक्का करवाया, यही कपालमोचन तीर्थ है। लाटभैरव का तालाब भैरवतीर्थ अथवा दण्डपाणिभैरव तीर्थ है। कपालमोचन ऋणमोचन के दक्षिण होना चाहिए। लाट भैरव उत्तर में है। प्राचीन कपालमोचन की यात्रा सम्भव न रहने पर उसकी प्रतिष्ठा इस तीर्थ में हुई।

95. कपाली भैरव – पुराना स्थान तक्षकुण्ड के उत्तर में था। वहां लुप्त। आजकल लाटभैरव की पूजा होती है।

96. कपालीश्वर प्राचीन स्थान कपालमोचन पर। अब लुप्त।

97. कपिलाह्रद – वरुणा पार कोटवां गांव में। कपिलधारा नाम से प्रसिद्ध।

98. कपिलेश्वर – प्राचीन स्थान ओमकारेश्वर का ही नाम। दूसरी स्थापना चौखम्भा के पास कपिलेश्वर गली में मकान-नं0 K 29/12 में। कपिलधारा नाम से प्रसिद्ध।

99. कपिलेश्वर द्वितीय – विश्वनाथ-मन्दिर के घेरे में वायव्यकोण के छोटे मन्दिर में निकुम्भ के पास गर्त में।

100. कम्बलाश्वतर तीर्थ – मणिकर्णिकेश्वर के उत्तर गंगाजी में।

101. कम्बलाश्वतरेश्वर – मणिकर्णिकेश्वर के समीप। मकान नं0 CK 8/14.

102. कर्कोटक नाग – नागकुँआ पर। मकान नं0 J 23/206.

103. कर्कोटक वापी – नागकुँआ नाम से प्रसिद्ध मकान-नं0 J 23/206.

104. कर्कोटकेश्वर – नागकुँआ पर। मकान नं0 J 23/206.

105. कर्णादित्य – राजमन्दिर में मकान नं0 K 20/147 में।

106. कर्णदित्य तीर्थ – शीतला घाट तथा राजमन्दिर के नीचे की गंगा में।

107. करवीरेश्वर – वर्तमान स्थान मकान नं0 D 52/41 लक्ष्मीकुण्ड पर।

108. करुणेश्वर प्रथम ललिता घाट के समीप मकान नं0 CK 34/10 में।

109. करुणेश्वर द्वितीय – लिपि-प्रमाद से काशीखण्ड में वरुणेश्वर का नाम बिगड़कर करुणेश्वर हो गया।

110. करंघगेश्वर – लोलार्क के दक्षिण।

111. कलतीर्थ – संकठा घाट के उत्तर गंगा में। कलेश्वर का प्राचीन मन्दिर यहीं कहीं था।

112. कलशेश्वर कश्मीरीमल की हवेली के पीछे मकान नं0 CK 7/106 में।

113. कलिकालेश्वर – चन्द्रेश्वर के मन्दिर के सामने के दालान में कोने में गर्त में। मकान-नं0 CK 7/124.

114. कलिप्रियविनायक – साक्षीविनायक पर मनःप्रकाशमेश्वर में। मकान नं0 10/50.

115. कश्यपेश्वर – जंगतबाड़ी में मकान नं0 35/77 में।

116. कहोलेश्वर इनका प्रथम स्थान ज्येष्ठस्थान में था। वहां अब भी मकान नं0 K 63/22 में है, परन्तु अब ये कोल्हुआ में भी है।

117. कामकुण्ड – कामेश्वर के दक्षिण पहले एक कुण्ड था, जिसका नाम कामकुण्ड था।

118. कामेश्वर इस समय इनके दो मन्दिर हैं। एक तो प्राचीन स्थान पर मकान नं0 A 2/9 में प्रसिद्ध और दूसरा घासीटोला के गली के कोने पर मकान नं0 K 30/1 में।

119. कालगंगातीर्थ – रामघाट से उत्तर की ओर गंगा में मिला तीर्थ। इसके ऊपर पेड़ के नीचे सीढ़ियों पर कालविनायक हैं।

120. कालभैरव – इनका प्रथम स्थान ओंकारेश्वर के पश्चिम कपालमोचन सरोवर के तट पर था। तेरहवीं शताब्दी के आसपास इनकी पुनः स्थापना इनके वर्तमान स्थान पर हुई। मकान नं0 K 32/22.

121. कालमाधव – काठ की हवेली के पीछे मकान नं0 30/4 में। वहीं आमर्दकेश्वर भी है।

122. कालविनायक – रामघाट की सीढ़ियों पर पेड़ के नीचे मकान नं0 K 24/10 के द्वार पर।

123. कालकेश्वर – हनुमान-घाट पर मकान नं0 B 4/44 में।

124. कालेश्वर – दण्डपाणि गली में दण्डपाणि भैरव मन्दिर, मकान-नं0 K 31/49 में। अपने प्रथम स्थान पर इन्हीं का नाम वृद्धकालेश्वर हो गया है।

125. कालेश्वर द्वितीय – वरूणा-संगम पार। इनकी स्थापना काल नामक शिवगण ने की थी।

126. कालोदक कूप – वृद्धकाल का प्रसिद्ध कुँआ। मन्दिर, मकान नं0 K 52/39 में।

127. कालजंरेश्वर केदार क्षेत्र में।

128. कांचन वट – धर्मकूप के पास, जिसके नीचे सावित्री की मूर्ति है। मन्दिर, मकान नं0 D 2/15.

129. किरातेश्वर – भारतूतेश्वर के पास। मन्दिर, मकान नं0 CK 52/15 में गुप्तेश्र नाम से प्रसिद्ध अथवा समीप में ही। नक्शे में देखिये।

130. किरातेश्वर द्वितीय – शिवगण द्वारा स्थापित। केदारेश्वर के दक्षिण लाली घाट पर जयन्तेश्वर के समीप।

131. कीकसेश्वर हड़हा मुहल्ले में मन्दिर, मकान नं0 CK 48/55 में।

132. कुक्कुटेश्वर – पहला स्थान ज्येष्ठस्थान। अब दुर्गाजी के घेरे में मन्दिर, मकान नं0 B 27/2.

133. कुक्कुटेश्वर द्वितीय – वक्रतुण्डविनायक के समीप चौसट्ठी घाट के पास।

134. कुण्डोदरेश्वर – अस्सी संगम के पास अस्सी-घाट गंगा-तट पर बालू में दबे हुए।

135. कुन्तीश्वर इनका प्राचीन नाम कुम्भीश्वर है। वरूणा-संगम के पार मंदिर है।

136. कुब्जा देवी – पितामहेश्वर के मन्दिर में शीतला नाम से प्रसिद्ध। मन्दिर, मकान नं0 CK 7/92 शीतला गली में।

137. कुब्जाम्बरेश्वर – पितामहेश्वर के मन्दिर में। मन्दिर, मकान नं0 CK 7/92.

138. कुलस्तम्भइनके दो स्थान कहे जाते हैं – (1) विश्वनाथ के घेरे में विश्वनाथ जी के उत्तर कटेहरे में,    (2) अन्नपूर्णा के मन्दिर में ईशान कोण में।

139. कूटदन्त विनायक – क्रींकुण्ड पर सिद्धेश्वर-मन्दिर में मन्दिर, मकान नं0 B 3/335.

140. कूणिताक्ष विनायक – लक्ष्मीकुण्ड पर महालक्ष्मी के मन्दिर के पास मन्दिर, मकान नं0 52/38.

141. कूष्माण्ड विनायक – फुलवरिया गांव में।

142. कूष्माण्डेश्वर – स्वर्गद्वारी पर।

143. कृतुवाराह – देखिये यज्ञवाराहकेशव।

144. कृत्तिवासेश्वर कूप – प्राचीन स्थान पर मस्जिद, वर्तमान मन्दिर रत्नेश्वर के पूर्व मन्दिर, मकान नं0  K 46/23 में।

145. कृत्वीश्वर – कोनिया घाट के ऊपर वरूणा पार पाकर-वृक्ष के नीचे।

146. कृष्णेश्वर – संकठा मन्दिर की दीवार में हरिश्चन्देश्वर के सामने मन्दिर, मकान नं0 CK 7/159.

147. केदारेश्वर – केदारघाट पर प्रसिद्ध मन्दिर, मकान नं0 6/102 प्राचीन पुनः स्थापना आत्मा वीरेश्वर के समीप बृहस्पतिश्वर-मन्दिर में हुई थी। वहाँ भी वर्तमान मन्दिर, मकान नं0 CK 7/133 में।

148. केशवादित्य वरूणा संगम पर आदिकेशव-मन्दिर में।

149. कोकावाराह – सिद्धेश्वरी मन्दिर में घुसते ही बांये हाथ दीवार में। मन्दिर, मकान नं0 CK 7/124.

150. कोटितीर्थ – शैलपुत्री दुर्गा के दक्षिण। सन् 1822 ई0 तक था। अब लुप्त। कोटीश्वर-प्राचीन स्थान शैलेश्वर के दक्षिण-लुप्त। पुनः स्थापना त्रिलोचन-मन्दिर में (मन्दिर, मकान नं0 A 2/80) तथा साक्षी विनायक के समीप गली में मन्दिर, मकान नं0 D 10/49 में।

151. कोलाहल नृसिंह – गोमठ के पास मन्दिर, मकान नं0 CK 8/189 में।

152. कंकालभैरव गोमठ से मणिकर्णिका की सीढ़ियों पर मन्दिर, मकान नं0 CK 8/180 में। मूर्ति पर पीतल का पत्र चढ़ा है।

153. कंगनवाली हवेली का राममन्दिर – मन्दिर, मकान नं0 K 22/25 बिन्दुमाधव के समीप।

154. कंदुकेश्वर – सप्तसागर भूतपूर्व मुहल्ले में, मन्दिर, मकान नं0 63/29 में।

155. क्रोधन भैरव – कमच्छा मुहल्ले में कामाक्षा देवी के मन्दिर में। मन्दिर, मकान नं0 B 21/123.

156. खखोल्कादित्य – कामेश्वर महादेव के द्वार पर। मन्दिर, मकान नं0 A2/9.

157. खर्ननृसिंह तीर्थ – (1) दुर्गाघाट के ऊपर की नृसिंह की मूर्ति। मन्दिर, मकान नं0 K 22/53 (2) ब्रह्मचारिणी दुर्गा के मन्दिर में दुर्गाघाट के ऊपर। मन्दिर, मकान नं0 K 22/71.

158. खर्वनृसिंह तीर्थ – दुर्गाघाट के सामने गंगाजी में।

159. खर्वविनायक – आदिकेशव के समीप किले में।

160. गजकर्ण विनायक – कोतवालपुरा में ईशानेश्वर के मन्दिर में। मन्दिर, मकान नं0 CK 37/43.

162. गजविनायक – राजा दरवाजे के पास भारभूतेश्वर के मन्दिर में। मन्दिर, मकान नं0 CK 54/44 के पूर्व।

163. गणनाथ विनायक – ढुंढिराज गली के किनारे मन्दिर, मकान नं0 CK 37/1 में।

164. गदातीर्थ – आदिकेशव के सामने गंगाजी में।

165. गभस्तीश्वर – मंगलागौरी के मन्दिर में। मन्दिर, मकान नं0 K 24/34.

166. गरुड़तीर्थ – आदिकेशव के सामने गदातीर्थ से कुछ दक्षिण।

167. गरुडे़श्वर (1) कामेश्वर मन्दिर के द्वार पर खखोल्कादित्य के छोटे मन्दिर में, मकान नं0 A 2/9 (2) देवनाथपुरा में मन्दिर, मकान नं0 D 31/39 A में।

168. गिरिनृसिंह देहली विनायक के समीप।

169. गोकर्ण कूप – गोकर्णेश्वर के समीप। मन्दिर, मकान नं0 D 50/34 A के दक्षिण।

170. गोकर्णसरोवर इसको पाटकर गोकर्ण का मुहल्ला बसा था जिसका नाम अब काजीपुरा हो गया है बाद में इसी का नाम हौजकटोरा भी पड़ा।

171. गोकर्णेश्वर – काजीपुरा मुहल्ले में सड़क पर मकान नं0 D 50/34 A के दक्षिण।

172. गोदावरी तीर्थ – देखिये गौतमकुण्ड।

173. गोपी गोविन्द – प्राचीन स्थान राजघाट किले में दक्षिण की ओर, अब मकान नं0 K 4/24 में लालघाट पर।

174. गोपी गोविन्द तीर्थ – राजघाट के किले के मध्य भाग के सामने गंगा जी में।

175. गोप्रतारेश्वर तीर्थ प्रह्लाद घाट के दक्षिण गंगा जी में, वहीं नये घाट के ऊपर गोप्रतारेश्वर।

176. गोप्रेक्षेश्वर – प्राचीन स्थान राजघाट किले के दक्षिण भाग के मध्य में गोपी गोविन्द के समीप। वर्तमान में गोपी गोविन्द मन्दिर में लालघाट पर मकान नं0 K 4/24.

177. गोव्याघ्रेश्वर – दशाश्वमेध घाट पर, उनके सामने गंगा जी में गोव्याघ्रेश्वर तीर्थ।

178. गौतमकुण्ड – गोदौलिया के पोखरे का नाम। यहीं गोदावरी तीर्थ भी था जो अब लुप्त है।

179. गौतमेश्वर – गोदौलिया पर काशिराज के शिवाले के घेरे में पीछे की ओर मकान नं0 D 37/33.

180. गौरीकुण्ड – इसी का नाम हरपाप भी था, वह गंगा जी में केदार घाट पर है, प्रतीकात्मक कुण्ड घाट पर भी है।

181. गौरीकूप – काशीपुरा में काशी देवी के मन्दिर के दक्षिण का कुँआ। इसका दूसरा नाम अप्सरस कूप भी है।

182. गंगाकेशव – वर्तमान स्थान ललिता घाट पर मकान नं0 D 1/67 में। प्राचीन स्थान चौंसट्ठी घाट के दक्षिण गंगा महल घाट पर, अब लुप्त।

183. गंगाकेशव तीर्थ – गंगा महल घाट पर, अब लुप्त।

184. गंगादित्य ललिताघाट पर मकान नं0 D 1/67 में।

185. गंगेश्वर – (1) ज्ञानवापी के पूर्व पीपल के नीचे अब लुप्त। (2) पशुपतीश्वर के पूर्व मकान नं0 CK 13/79 में।

186. गन्धर्व सरोवर – नागकुँआ के पश्चिम का कुण्ड। समीप के मन्धवेंश्वर लुप्त। इसका वर्तमान नाम भीरन सागर है।

187. घण्टाकर्णगण – कर्णघण्टा तालाब के दक्षिण पानी भर जाने से लुप्त, मकान नं0 K 60/67 में।

188. घण्टाकर्णहृद – कर्णघण्टातालाब। प्रसिद्ध मकान नं0 K 60/67 में।

189. घण्टाकर्णेश्वर – कुंए के पास कंठेश्वर नाम से अब प्रसिद्ध, मकान नं0 K 60/67.

190. चक्रतीर्थ – आदि केशव के सामने गंगा जी में।

191. चक्रपुष्करिणी – मणिकर्णिका का नाम। इस घाट पर जो कुण्ड है उसी की इस नाम से पूजा होती है।

192. चतुर्दन्तविनाय – धुवेश्वर के मन्दिर के समीप।

193. चतुर्मुखेश्वर वृद्धकाल के घेरे में। मकान नं0 K 52/39.

194. चतुर्वकोश्वर – शकरकन्द गली में मकान नं0 D 7/19 में।

195. चतुःसागरवापी – इसका नाम चतुःसमुद्रकूप भी है। काशीपुरा की सड़क पर का कुंआ मकान नं0 K 63/46 के सामने।

196. चर्चिकादेवी – पंचगंगेश्वर से मंगालगौरी जाते हुए सीढ़ी चढ़ते ही मकान नं0 K 23/72 में।

197. चण्डभैरव – दुर्गाजी के घेरे में, काली जी के मन्दिर में। मकान नं0 B 27/2.

198. चण्डी चण्डीश्वर – कालिका गली में मकान नं0 D 8/27 में पुरानी भग्न व नवीन दोनों मूर्तियां हैं।

199. चण्डीश्वर – सदर बाजार में चण्डी देवी के मन्दिर में।

200. चन्द्रकूप – सिद्धेश्वर मुहल्ले में मकान नं0 CK 7/124.

201. चामुण्डा देवी – भदैनी में लोलार्क के पास अर्कविनायक के मन्दिर में। चामुण्डा मुण्डरूपिणी।

202. चित्रकूप – चित्रगुप्तेश्वर में राजा दरवाजे के समीप मकान नं0 CK 57/77 में।

203. चित्रगुप्तेश्वर – राजा दरवाजे के समीप मकान नं0 CK 57/77 में, चित्रगुप्त की मूर्ति भी है।

204. चित्रग्रीवा देवी – केदारेश्वर के समीप। मकान नं0 B 14/118 में भग्नावस्था में।

205. चित्रघण्ट विनायक – इनके दो स्थान कहे जाते हैं (1) रानी कुँआ पर मकान नं0 CK 23/25 के पास छोटे संगमरमर के मन्दिर में तथा (2) जगन्नाथ दास बलभद्र दास के दुकान के चबूतरे पर मकान नं0 CK 39/74-76 में।

206. चित्रघण्टा देवी – लक्खी चबूतरे के सामने गली में मकान नं0 CK 23/34 में।

207. चित्रांगदेश्वर – केदारेश्वर के समीप मकान नं0 B 14/118 में चित्रग्रीवा देवी के साथ।

208. चिन्तामणि विनायक प्रथम – सिन्धिया घाट के ऊपर वशिष्ट वामदेव मन्दिर के द्वार पर मकान नं0 CK 7/161.

209. चिन्तामणि विनायक द्वितीय – ईश्वरगंगी मुहल्ले में जागेश्वर मन्दिर की बाहरी दीवार में मकान नं0 K 66/4.

210. चिन्तामणि विनायक तृतीय – देखिये लम्बोदर विनायक।

211. छागलेश्वर – पितृकुण्ड पर मकान नं0 C 18/52.

212. छागवक्त्रगण – कपिल धारा पर छागवक्त्रेश्वरी मन्दिर में।

213. छागवक्त्रेश्वरी देवी – कपिल धारा पर।

214. जटीश्वर – पातालेश्वर नाम से प्रसिद्ध। मकान नं0 D 32/117 के द्वार पर।

215. जनकेश्वर प्रथम – वृद्धकाल के घेरे में मकान नं0 K 52/39 में, संकटा जी के पास भी।
216. जनकेश्वर द्वितीय – दुर्गा कुण्ड के पश्चिम शुकुलपुर में अत्यन्त प्राचीन मूर्तियों के साथ।
217. जमदग्नीश्वर – कालभैरव के पूर्व मकान नं0 K 32/57 में।
218. जम्बुकेश्वर – बड़े गणेश पर मकान नं0 K 58/103.
219. जयन्तलिंग – केदारेश्वर के दक्षिण लालीघाट पर।
220. जयन्तेश्वर – भूत भैरव पर मकान नं0 K 63/27.
221. जरासंधेश्वर – मीरघाट पर मकान नं0 D 3/79 में, प्राचीन स्थान लुप्त।
222. जरासंधेश्वर तीर्थ – मीरघाट पर गंगा जी में।
223. जललिंग – मणिकर्णिका श्मशान पर जलशायी घाट के सामने गंगाजी के भीतर। चितास्थ शव का रुद्रांश इनको ही अर्पित होता है।
224. जानकीकुण्ड – सीताकुण्ड नाम से प्रसिद्ध, लक्सा मुहल्ले में।
225. जांगलेश्वर – मुकुट कुण्ड पर अथवा दुर्गाजी के मन्दिर में अथवा कामाख्या पर वास्तविक स्थान अज्ञात।
226. जैगीषव्यगुहा – जागेश्वर के दक्षिण मठ में मकान नं0 J 66/3.
227. जैगीषव्येश्वर – (1) जैगीषव्य गुहा के द्वार पर मकान नं0 J 66/3 में। (2) भूत भैरव के सामने उसी मन्दिर में मकान नं0 K 63/28.
228. ज्येष्ठ विनायक – (1) ज्येष्ठेश्वर के मन्दिर में, सप्तसागर मुहल्ला मकान नं0 K 62/144 (2) लालीघाट पर पुनः स्थापित।
229. ज्येष्ठागौरी – मकान नं0 K 63/24 में भूत भैरव पर।
230. ज्येष्ठावापी – इसी स्थान पर लुप्त।
231. ज्योतिरूपेश्वर – मणिकर्णीश्वर के समीप काकाराम की गली में। स्वामी बलजी परमार्थभवन, मकान नं0 CK 8/10 में।
232. ज्वालामालीनृसिंहकपिलधारा के समीप कोटवा गांव में।
233. ढुंढितीर्थ – ढुंढिराज के दक्षिण लुप्त गंगाजी में मणिकर्णिका घाट के समीप।
234. ढुंढिराज विनायक – (1) प्रसिद्ध ढुंढिराज गली में (2) सटे हुए रानी भवानी के मन्दिर में (मकान नं0 CK 35/28) पंचमुखी (3) समीप में मकान नं0 CK 37/18 पंचमुखी।
235. तत्वेश – धर्मकूप के समीप मकान नं0 D 3/97 में।
236. तक्षककुण्ड – वासुकिकुण्ड के पश्चिम, लुप्त।
237. तक्षकेश्वर – पियरी मुहल्ले में तकिया औघड़नाथ के समीप मकान नं0 K 64/113.
238. ताम्रवाराह – ब्रह्मनाल पर नीलकण्ठ के समीप मकान नं0 CK 33/57 में।
239. ताम्रवाराह तीर्थ – मंगला गौरी घाट तथा रामघाट के बीच गंगा जी में।
240. तारकतीर्थ – मणिकर्णिका पर तारकेश्वर के सामने गंगा जी में।
241. तारकेश्वर प्रथम – ज्ञानवापी के पूर्व गौरीशंकर मन्दिर के नीचे।
242. तारकेश्वर द्वितीय – तारक तीर्थ के ऊपर मणिकर्णिका घाट पर।
243. तारकेश्वर तृतीय – केदारघाट पर बुर्जी के नीचे, शिवगणों द्वारा स्थापित।
244. तार्क्ष्यकेशव – आदिकेशव में अब लुप्त।
245. तार्क्ष्यतीर्थ – आदिकेशव के सामने।
246. तिलपर्णेश्वर – दुर्गा जी के घेरे में। इनके मन्दिर के द्वार पर बलि चढ़ती है, मकान नं0 B 27/2.
247. तिलभाण्डेश्वर – पाण्डेय हवेली मुहल्ले में प्रसिद्ध।
248. तुंगेश्वर – धन्वन्तरीश्वर नाम से वृद्धकाल के घेरे में मकान नं0 K 52/39.
249. त्वाष्ट्रेश्वर – विश्वकर्मेश्वर नाम से बृहस्पतीश्वर के मन्दिर में मकान नं0 CK 7/133.
250. दत्तात्रेयेश्वर प्रथम – वर्तमान स्थान (1) मकान नं0 CK 34/36. दत्तात्रेयेश्वर मठ में (2) नारदघाट पर।
251. दत्तात्रेयेश्वर द्वितीय – मणिकर्णिका घाट पर।
252. दत्तात्रेयेश्वर तीर्थ – राजघाट किले के सामने गंगा जी में।
253. दशहरेश्वर – दशाश्वमेध घाट पर शीतला जी के मन्दिर में।
254. दशाश्वमेध तीर्थ – दशाश्वमेध घाट पर से अहिल्याबाई घाट तक गंगा जी में।
255. दशाश्वमेधेश्वर – दशाश्वमेध घाट पर शीतला जी के मन्दिर में।
256. दक्षेश्वर – वृद्धकाल के मन्दिर में। (मकान नं0 K 52/39)
257. दण्डखात तीर्थ – पियाला शहीद का कुण्ड-लुप्त।
258. दण्डपाणि – (1) ढुंढिराज गली में मकान नं0 CK 36/10 में गली के कोने पर। (2) कालभैरव-मन्दिर के पीछे, मकान नं0 K 32/26 में क्षत्रपाल नाम से। (3) शिवलिंग रूप से विश्वनाथ जी के घेरे में बैकुण्ठेश्वर के पश्चिम के मन्दिर में।
259. दण्डपाणिभैरव – महाश्मशान-स्तम्भ की पुनः स्थापना। मकान नं0 K 31/49 में।
260. दन्तहस्त विनायक – बड़े गणेश-मन्दिर में।
261. दण्डीश्वर – देहली विनायक के पूर्व पंचक्रोशी मार्ग पर।
262. दण्डीश्वर द्वितीय – दण्डखात तीर्थ के दक्षिण लुप्त।
263. दाल्भ्येश्वर – मानमन्दिर घाट के ऊपर। मकान नं0 D 16/28.
264. दाक्षायिणीश्वर – सतीश्वर नाम से प्रसिद्ध मकान नं0 K 46/32.
265. दिलीपेश्वर – देवनाथपुरा में। समीप का दिलीपतीर्थ लुप्त।
266. दिवोदास – इनकी स्वप्न देकर निकली हुई मूर्ति परशुरामेश्वर के समीप मकान नं0 CK 14/43 में है।
267. दिवोदासेश्वर – (1) विश्वभुजा गौरी के मन्दिर में मकान नं0 D 2/13. (2) परशुरामेश्वर के पास पशुपतीश्वर की गली में मकान नं0 CK 13/76 पिण्डिका लुप्त।
268. दीप्ताशक्ति सूर्यकुण्ड पर साम्बादित्य के समीप।
269. दुर्गविनायक – दुर्गाजी के घेरे में टीले के पूर्व। मकान नं0 B 27/2.
270. दुर्गा दुर्गाकुण्ड पर प्रसिद्ध। मकान नं0 B 27/2.
271. दुर्मुख विनायक – कचौड़ी गली में मकान नं0 CK 34/60 में।
272. दुर्वासेश्वर (प्रथम) – रानी बेतिया के मन्दिर के घेरे में आपाढ़ीश्वर के पास।
273. दुर्वासेश्वर (द्वितीय) कामेश्वर मन्दिर में। मकान नं0 A 2/9.
274. दृमिचण्डेश्वर – जैतपुरा में नागकुँआ के दक्षिण ‘मल्लू हलवाई का मन्दिर’ के नाम से प्रसिद्ध मकान नं0 J 11/148 समीप का दृमिचण्डेश्वर-कुण्ड लुप्त।
275. देवदेव – ढुंढिराज गली में। सन्यासी कालेज में। मकान नं0 CK 37/12.
276. देवयानीश्वर – नकुलीश्वर नाम से प्रसिद्ध। विश्वनाथ जी के समीप अक्षयवट की जड़ में मकान नं0 CK 35/20.
277. देहली विनायक – पंचक्रोशी मार्ग पर प्रसिद्ध।
278. द्रौपदादित्य विश्वनाथ जी के समीप अक्षयवट के पास। मकान नं0 CK 35/20.
279. द्रौपदी द्रौपदादित्य के निकट। मकान नं0 CK 35/20.
280. द्वारविनायक – पांचोंपाण्डव मन्दिर में मकान नं0 CK 28/10.
281. द्वारेश्वर वर्तमान काल में दुर्गा जी के दक्षिण के मन्दिर में। प्राचीन स्थान कमच्छा पर।
282. द्वारेश्वरी वहीं जलहरेश्वरी देवी नाम से प्रसिद्ध।
283. द्विमुखविनायक – सूर्यकुण्ड पर साम्बादित्य के पास।
284. धनेश्वर – धनेश्वरा के समीप बाबा नृसिंह दास के मठ में। मकान नं0 J 4/91.
285. धनदेश्वर कुण्ड – धनेसरा तालाब।
286. धन्वन्तरिकूप वृद्धकाल के मन्दिर के द्वार पर सड़क के किनारे।
287. धरणिवाराह – देखिये क्षोणीवाराह।
288. धरणिवाराह तीर्थ – तीर्थ क्षोणीवाराह तीर्थ।
289. धर्मकूप – मीरघाट के ऊपर थोड़ी दूर पर धर्मेश्वर के घेरे में। मकान नं0 D 2/10 के पूर्व।
290. धर्मपीठ – धर्मेश्वर के चारों ओर का क्षेत्र जिसकी सीमा पर पूर्व में वैराग्येश, पश्चिम में धरिणीश, उत्तर में ऐश्वर्येश, दक्षिण में तत्वेश तथा ईशान कोण में ज्ञानेश्वर है। ये धर्मेश्वर के पंचवस्त्र कहे जाते हैं।
291. धर्मेश्वर प्रथम – धर्मकूप मुहल्ले में मकान नं0 D 2/21 में।
292. धर्मेश्वर द्वितीय – कामेश्वर के दक्षिण क्षेत्र में लुप्त।
293. धर्मेश्वर तृतीयभद्रेश्वर में अथवा दक्षिण-क्षेत्र में लुप्त। यह भी सम्भव है कि द्वितीय तथा तृतीय धर्मेश्वर एक ही हों।
294. धर्मेश्वर कुण्ड – द्वितीय धर्मेश्वर के समीप, लुप्त।
295. धौतपापेश्वर – पंचगंगा घाट पर पुश्ते के नीचे।
296. ध्रुवकुण्ड – धु्रवेश्वर के समीप लुप्त। यही मिश्रक तीर्थ और मिसिर पोखरा नाम से प्रसिद्ध है।
297. धु्रवेश्वर – सनातनधर्म कालेज के समीप धु्रुवेश्वर मुहल्ले में।
298. नकुलेश्वर – विश्वनाथ मन्दिर के पश्चिम अक्षयवट में। मकान नं0 CK 35/20.
299. नरनारायणकेशव – महथा घाट पर बद्रीनारायण नाम से प्रसिद्ध मकान नं0 A 1/72.
300. नरनारायणतीर्थ राजघाट किले के मध्य भाग के समीप गंगा जी में।
301. नर्मदेश्वर प्रथम – नर्मदा तीर्थ के ऊपर, लुप्त।
302. नर्मदेश्वर द्वितीय – त्रिलोचन मन्दिर के पीछे मकान नं0 A 2/79.
303. नलकूबेर कूप – कामेश्वर के मन्दिर के सामने।
304. नलकूबेश्वर प्रथम – प्राचीन नाम पंचालकेश्वर जो कामेश्वर के पूर्व में थे, लुप्त। इनकी पुर्नस्थापना घासी टोला में मकान नं0 K 30/6. में हुई।
305. नलकूबेश्वर द्वितीय – मणिकर्णीश्वर के समीप पितामहेश्वर के गह्वर में। मकान नं0 CK 7/92.
306. नक्षत्रेश्वर – आदिकेशव के निकट।
307. नागेश्वर – (1) गायघाट का शिवलिंग। (2) महथाघाट पर मकान नं0 A 1/72 में। (3) भोंसला घाट पर मकान नं0 CK 1/21 से सटे मन्दिर में।
308. नागेश्वर तीर्थ – गायघाट तथा महथाघाट के सामने गंगा जी में।
309. नागेशविनायक – (1) भोंसला घाट के समीप नागेश्वर के मन्दिर में, मकान नं0          CK 1/21 के पास। (2) महथाघाट पर मकान नं0 A 1/72 में।
310. नाभितीर्थ – देखिये ब्रह्मनाल।
311. नारदकेशव – प्रह्लाद घाट पर, अब लुप्त।
312. नारदतीर्थ – आदिकेशव से कुछ पश्चिम गंगा जी में।
313. नारदेश्वर – भद्रेश्वर क्षेत्र में, लुप्त। वर्तमान नारदघाट के ऊपर मकान नं0 D 25/12 में।
314. नारदेश्वर कुण्ड – भद्रेश्वर क्षेत्र में अब लुप्त।
315. नारायणी देवी गोपी गोविन्द के पश्चिम। सम्भवतः शीतला नाम से मकान नं0 K 20/19 में।
316. निकुम्भेश्वर – विश्वनाथ जी के घेरे में पार्वती देवी के मन्दिर के कोने में गह्वर में।
317. निगड़भंजनी देवी – देखिये ‘बन्दी देवी’।
318. निर्वाण केशव – (1) भदैनी में लोलार्क के समीप। (2) वृद्धकाल मन्दिर के दक्षिण में।
319. निवासेश्वर – काशीपुरा के सड़क पर मकान नं0 K 63/46 के सामने, अब लुप्त।
320. निष्कलंकेश्वर – ढुंढिराज गली में मकान नं0 CK 35/34 में।
321. निष्पापेश्वर केदार घाट पर कुण्ड के समीप।
322. नीलकण्ठ – प्रथम स्थान केदार के दक्षिण मकान नं0 B 6/99 में। द्वितीय स्थान ब्रह्मस्थान के समीप मकान नं0 CK 33/23 में।
323. नीलकण्ठ द्वितीय – क्रींकुण्ड के उत्तर सड़क पर मकान नं0 B 10/32 में।
324. नीलग्रीव तीर्थ – राजघाट से थोड़ा पूरब गंगा जी में। काशीखण्ड में हयग्रीव तीर्थ भी कहा गया।
325. नैर्ऋतेश्वर – पुष्पदन्तेश्वर के समीप।
326. नन्दिकेश्वर – ज्ञानवापी के उत्तर, लुप्त।
327. पद्मतीर्थ – आदिकेशव के सामने गंगा जी में।
328. परद्रव्येश्वर – ढुंढिराज गली में मकान नं0 CK 35/34 में।
329. पर्वत तीर्थ वीरेश्वर घाट के सामने गंगा जी में।
330. पर्वतेश्वर – वीरेश्वर घाट की सीढ़ियों पर मकान नं0 CK 7/150 में।
331. परशुराम तीर्थ – नन्दन साहू मुहल्ले में परशुरामेश्वर के समीप, लुप्त।
332. परान्नेश – ढुंढिराज गली में मकान नं0 CK 35/34 में।
333. पराशरेश्वर कर्णघण्टा तालाब के दक्षिण व्यासेश्वर के समीप, मन्दिर अब जलमग्न है।
334. पवनेश्वर – भूत भैरव पर मकान नं0 K 63/14 में।
335. पशुपति तीर्थ – मणिकर्णिका घाट के सामने गंगा जी में।
336. पशुपतीश्वर – पशुपतेश्वर मुहल्ले में मकान नं0 CK 13/66 में, प्रसिद्ध।
337. पंचचूड़ा सरोवर – कर्णघण्टा तालाब के उत्तर सप्तसागर मुहल्ले में, अब लुप्त।
338. पंचनद तीर्थ – पंचगंगाघाट का दक्षिणी भाग जिसको कोनिया घाट भी कहते हैं। वहीं पर मढ़ी में शेषशायी की मूर्ति। पंचगंगा घाट के प्रथम निर्माण का शिलालेख भी इसी में था, अब लुप्त।
339. पंचनदेश्वर – तैलंगमठ के समीप बिन्दुमाधव मार्ग पर मकान नं0 K 22/11 में, पंचगंगेश्वर नाम से भी प्रसिद्ध।
340. पंचमुद्रपीठ – पहले स्वर्लीनेश्वर के उत्तर, अब संकठा जी के मन्दिर तथा आस-पास का क्षेत्र।
341. पंचास्यविनायक – पिशाचमोचन पर मकान नं0 C 21/40 में।
342. पंचाक्षेश्वर – त्रिलोचन के समीप रुद्राक्षेश्वर नाम से प्रसिद्ध, मकान नं0 A 2/56 में।
343. पादोदक कूप – त्रिलोचन गली से पूर्व मकान नं0 A 3/87 में, पिलपिला का कुंवा के नाम से प्रसिद्ध।
344. पादोदक तीर्थ – वरूणासंगम पर आदिकेशव के सामने गंगा जी में।
345. पापभक्षण – कालभैरव के दक्षिण गली में त्रिलोचन के पिछवाड़े।
346. पार्वतीश्वर – आदि महादेव के मन्दिर में।
347. पाराशर्येश्वर – लोलार्क के समीप मकान नं0 B 2/21 में।
348. पाशपाणि विनायक – सदर बाजार में, प्रसिद्ध।
349. पाशुपत तीर्थ – मणिकर्णिका के दक्षिण गंगा जी में।
350. पाण्डवेश्वर – (1) ज्ञानवापी के उत्तर फाटक के पास मकान नं0 CK 28/10 में। (2) संकठा जी के दक्षिणी की गली में। (3) दण्डपाणि भैरव पर मकान नं0 K 31/49 में।
351. पिचिण्डिल विनायक – प्रह्लाट घाट पर मकान नं0 A 10/80 में फाटक के भीतर।
352. पितामह तीर्थ – मणिकर्णिका घाट के दक्षिण गंगा जी में।
353. पितामहेश्वर द्वितीय – ज्येष्ठेश्वर में, अब लुप्त।
354. पितृकुण्ड – वर्तमान पितरकुण्डा।
355. पित्रीश्वर – पितृकुण्ड पर मकान नं0 C 18/47 में।
356. पिप्पलाद तीर्थ – मंगलागौरी घाट के दक्षिण गंगा जी में।
357. पिप्पलादेश्वर – बिन्दुमाधव के वर्तमान मन्दिर के पास वृक्ष के नीचे, अब लुप्त।
358. पिलप्पिला तीर्थ – त्रिलोचन घाट पर गंगा जी में।
359. पिशाचमोचन तीर्थ – प्रसिद्ध।
360. पिशाचेश्वर – पिशाचमोचन तालाब के पास मकान नं0 C 21/40 में।
361. पिशंगिला तीर्थ – त्रिलोचन घाट के पूर्वोत्तर का मिला हुआ भाग।
362. पिंगलेश्वर – पिशाचमोचन पर मकान नं0 C 21/39 में, नकुलेश्वर नाम से प्रसिद्ध।
363. पुलस्त्येश्वर (1) जंगमबाड़ी मठ के द्वार पर मकान नं0 B 35/77. (2) स्वर्गद्वारी पर मकान नं0 CK 33/43.
364. पुलहेश्वर – पुलस्त्येश्वर के सामने मकान नं0 CK 10/16 के चबूतरे पर।
365. पुष्पदन्तेश्वर – देवनाथ पुरा में मकान नं0 D 32/102 में।
366. पृथुतीर्थ – वरुणापार खजुरी गांव में।
367. पृथ्वीश्वर – वहीं, पिसनहरिया पर।
368. प्रचण्ड नरसिंह – दुर्गाजी के मन्दिर में, अब लुप्त। अस्सी संगम पर जगन्नाथ जी में नृसिंह मूर्ति का पूजन होता है।
369. प्रणवतीर्थ – (1) त्रिलोचन घाट से उत्तर गंगा जी में (2) राजघाट के सामने गंगा जी में।
370. प्रणव विनायक – त्रिलोचन घाट पर ऊपर हिरण्यगर्भेश्वर के मन्दिर में।
371. प्रतिग्रहेश्वर – ढुंढिराज गली में मकान नं0 CK 35/43 में।
372. परपितामहेश्वर – पितामहेश्वर के मन्दिर में कश्मीरामल की हवेली के पास शीतला गली में मकान नं0 CK 7/92 में फाटक के भीतर।
373. प्रभासतीर्थ (1) सोमेश्वर घाट पर पाण्डेय हवेली के समीप। (2) अब सोमेश्वर के समीप गंगा जी में मानमन्दिर घाट पर। (3) ऋणमोचन तीर्थ के ईशानकोण में जो सरोवर नौआ का पोखरा नाम से विख्यात है उसका भी प्रभासतीर्थ का माहात्म्य है। इसका नाम पापमोचन तीर्थ भी है।
374. प्रमोदविनायक – नैपाली खपड़ा में मकान नं0 CK 31/16 में।
375. प्रयागस्रोत – प्रयागघाट पर पूर्ववाहिनी यमुना का सोता जो पृथ्वी के नीचे से बहता हुआ गंगा जी में गिरता है।
376. प्रह्लादकेशव – प्रह्लादघाट पर मकान नं0 A 10/80 में।
377. प्रह्लादतीर्थ – राजघाट के किले के मध्य भाग के सामने गंगा जी में।
378. प्रह्लादेश्वर – देखिये प्रह्लादकेशव।
379. प्रीतिकेश्वर – साक्षी विनायक के पिछवाड़े मकान नं0 D 10/8 में।
380. बलिकुण्ड – काशीखण्ड में इसका नाम बन्दीकुण्ड है। धनेसरा के दक्षिण मोहम्मद शहीद गड़हा जो सन् 1822 ई0 तक था, अब लुप्त। समीप के बलीश्वर या बन्दीश्वर भी लुप्त।
381. बलिवामन – आदिकेशव के पास उत्तर के घेरे में।
382. बन्दीतीर्थ – दशाश्वमेध घाट पर अब लुप्त।
383. बन्दीदेवी – दशाश्वमेध घाट पर मकान नं0 D 17/100 में।
384. बाणतीर्थ प्रह्लाद घाट के समीप गंगा जी में।
385. बाणेश्वर प्रथम – स्वर्लीनेश्वर के ईशानकोण में, अब लुप्त।
386. बाणेश्वर द्वितीय – अस्सी मुहल्ले में असिसंगमेश्वर के मन्दिर में मकान नं0 B 2/177.
387. बाणेश्वर तृतीय – मणिकेश्वर के समीप अब लुप्त। पुर्नस्थापना साहू मुहल्ले में मकान नं CK 13/47 में। वहीं बाणासुर की हजार हाथों वाली मूर्ति भी है।
388. बालचन्द्रकूप – प्राचीन नाम तालकर्णकूप और औसानगंज मुहल्ले में मकान नं0 K 56/114.
389. बिन्दुतीर्थ – लक्ष्मणबाला घाट के सामने गंगा जी में।
390. बिन्दुमाधव – इनके चार मन्दिर वर्तमान हैं। (1) बिन्दुमाधव घाट के ऊपर पंचगंगा पर मकान नं0 K 22/33 में। (2) लालघाट के समीप बुचई टोला में मकान नं0 K 4/4 में। (3) भाट गली में मकान नं K 33/18 में। (4) ब्रह्माघाट पर मठ में।
391. बिन्दुविनायक – बिन्दुमाधव मन्दिर में पंचगंगा घाट पर मकान नं0 K 22/33 में।
392. बुधेश्वर – आत्मवीरेश्वर के द्वार के सामने मकान नं0 CK 7/133 में, प्रसिद्ध।
393. ब्रह्मतीर्थ – बालमुकुन्द के चौहट्टे के ब्रह्मेश्वर के समीप, अब लुप्त।
394. ब्रह्मनालतीर्थ – मणिकर्णिका घाट के दक्षिण भाग में।
395. ब्रह्मावर्तकूप – ढुंढिराज गली में अपारनाथ मठ में मकान नं0 CK 37/12.
396. ब्रह्मेश्वर – इनके तीन मन्दिर हैं (1) बालमुकुन्द के चौहट्टे में मकान नं0 D 33/66-67 (2) ब्रह्माघाट पर मकान नं0 K 22/82 में (3) वहीं मकान नं0 K 22/89 में भी। ब्रह्माघाट की सीढ़ियों के पूर्व दालान में ब्रह्माजी की तेरहवीं शती की मूर्ति जिसके कारण इस घाट का नाम पड़ा।
397. ब्राह्मीदेवी – बालमुकुन्द के चौहट्टे में ब्रह्मेश्वर के मन्दिर में मकान नं0 D 33/66-67.
398. ब्राह्मीश्वर – शकरगन्द गली में मकान नं0 B 7/6 में।
399. भगीरथलिंग – मणिकर्णिका के दक्षिण में बाबा विश्वनाथ सिंह के लकड़ी के अड़ार में। मकान नं0 CK 10/49 के सामने।
400. भगीरथविनायक – करुणेश्वर के समीप लाहौरी टोले में।
401. भद्रकर्णह्रद – पंचकोशी मार्ग पर रामेश्वर के निकट भुइली गांव में।
402. भद्रकर्णेश्वर – वहीं।
403. भद्रकाली – (1) मध्यमेश्वर मन्दिर में (2) उसी के उत्तर मकान नं0 K 53/107 में।
404. भद्रवनीकुण्ड भवनियां गड़ही, सम्भवतः यही महासिद्धीश्वर कुण्ड है।
405. भ्रदह्रद (भद्रदोह) – प्राचीन ह्रद भदऊँ मुहल्ले में, अब लुप्त। वर्तमान भोंसलाघाट पर नागेश्वर के नीचे पर पक्का कुण्ड जो बालू से ढका रहता है।
406. भद्रेश्वर – प्राचीन स्थान भदऊँ मुहल्ले में, अब लुप्त। वर्तमान स्थान अग्नीश्वर घाट के ऊपर उपशान्तेश्वर मन्दिर में मकान नं0 CK 2/4.
407. भरतेश्वर हनुमान घाट पर मकान नं0 B 4/9 में।
408. भवतीर्थ ब्रह्मनाल के उत्तर गंगा जी में ऊपर ताम्र वाराह की मूर्ति।
409. भवानीगौरी – वाराणसी की प्रधान देवी जो प्राचीन काल की अन्नपूर्णा हैं। अन्नपूर्णा जी के बगल के राजमन्दिर में जगन्नाथ जी तथा काली जी के बीच में। प्राचीन काल में यहाँ पर एक कुण्ड भी था जो भवानी तीर्थ कहलाता था।
410. भवानीतीर्थ – (1) इस समय यह अन्नपूर्णा जी के पास के राजमन्दिर में काली जी के सामने के दालान में फर्श के नीचे पक्के कुण्ड रूप में दबा पड़ा है। (2) गंगा जी में मणिकर्णिका घाट के समीप।
411. भवानीश्वर भवानी गौरी के पास चबूतरे पर राममन्दिर में काली तथा भवानी गौरी के बीच में।
412. भस्मगात्रेश्वर – काशी करवट के दक्षिण मकान नं0 CK 31/15 में।
413. भागीरथी तीर्थ – ललिताघाट के उत्तर गंगा जी में।
414. भागीरथी देवी – ललिता घाट पर मकान नं0 D 1/67 में।
415. भागीरथीश्वर – स्वर्गद्वारी पर पं0 मुक्तानन्द चतुर्वेदी के मकान में मकान नं0 CK 11/11.
416. भार्गवतीर्थ – राजघाट किले के मध्य भाग के सामने गंगा जी में।
417. भारद्वारेश्वर – संकठा जी के निकट वशिष्ठ महादेव मन्दिर में मकान नं0 CK 7/161.
418. भारभूतेश्वर – राजा दरवाजे पर मकान नं0 CK 54/44 के पूर्व में।
419. भीमकुण्ड – भीमचण्डी पर, पंचकोशी मार्ग में।
420. भीमचण्ड विनायक – वहीं भीमचण्डी मन्दिर में।
421. भीमचण्डी देवी – पंचकोशी मार्ग पर प्रसिद्ध।
422. भीमेश्वर नैपाली खपड़ा मुहल्ले में काशी करवट पर मकान नं0 CK 31/12 में।
423. भीषणभैरव – भूतभैरव नाम से प्रसिद्ध भूतभैरव मुहल्ले में मकान नं0 K 63/28 में।
424. भीष्मकेशव – वृद्धकाल मन्दिर के दालान में मकान नं0 K 52/39.
425. भीष्मचण्डी – शैलपुत्री दुर्गा के दक्षिण, अब लुप्त। सदर बाजार की चण्डी देवी 5वीं शती में भीष्मचण्डी कही जाती थीं जो उनकी पुर्नस्थापना है।
426. भीष्मेश्वर – भीष्मचण्डी के समीप, अब लुप्त।
427. भीमेश्वर द्वितीय त्रिलोचन घाट पर नीचे की मढ़ी का छोटा शिवलिंग।
428. भूतधात्रीश – भूतेश्वर के नाम से प्रसिद्ध दशाश्वमेध के समीप ऊपर गली में मकान नं0 B 17/50. पुनःस्थापना सुखलाल साह के फाटक के भीतर मकान नं0 CK 13/15 में भी हुई।
429. भूतीश्वर – काशीपुरा में रानी बेतिया के मन्दिर के घेरे में आषाढ़ीश्वर के मन्दिर में।
430. भृगुकेशव – वर्तमान गोला घाट के पास नन्दू फड़िया की सीढ़ी पर मकान नं0 A 4/13 में।
431. भृगुनारायण – सप्तसागर पर पवनेश्वर मन्दिर में मकान नं0 K 63/14.
432. भृंगीशेश्वर – इनका ही नाम तुंगेश्वर तथा धन्वन्तरीश्वर। वर्तमान स्थान वृद्धकाल के घेरे में धन्वन्तरीश्वर नाम से प्रसिद्ध मकान नं0 K 32/39.
433. भैरवकूप – कालभैरव के उत्तर भैरव वावली नामक मुहल्ले में अब लुप्त मकान नं0 K 40/20.
434. भैरवतीर्थ – ब्रह्माघाट के सामने गंगा जी में।
435. भैरवेश्वर – काल भैरव के पश्चिम गली के कोने पर मकान नं0 K 32/7 में।
436. मखतीर्थ – पंचगंगाघाट के पास लक्ष्मणबाला घाट के सामने गंगा जी में।
437. मखेश्वर – वहीं, अब लुप्त।
438. मणिकर्णिकातीर्थ यह अपने आप में स्वयं एक तीर्थसंकुल है- सिन्धिया घाट से गंगामहल घाट तक जो चौसट्ठी घाट के दक्षिण में है। परन्तु मणिकर्णिका घाट का प्राधान्य है। जहां चक्रपुष्करिणी मणिकर्णिकेश्वर, मणिकर्णीदेवी इत्यादि।
439. मणिकर्णिकेश्वर इनका दूसरा नाम मणिकर्णीश्वर भी है। घाट के ऊपर मकान नं0 CK 8/12 में। दर्शन ऊपर से गोमठ के समीप से भी होता है।
440. मणिकर्णीविनायक – मणिकर्णिका घाट पर मकान नं0 CK 10/48 के सामने।
441. मणिप्रदीपकुण्ड दुहरी गड़ही के पूर्व नागनाथ मुहल्ले में सन् 1822 तक था, अब लुप्त। स्ट्रेथफील्ड रोड इसको पाटकर निकाली गयी थी।
442. मणिप्रदीपनाग – समीप में ही मन्दिर, अब लुप्त।
443. मत्स्योदरीतीर्थ – मच्छोदरी का पोखरा, प्रसिद्ध।
444. मदालसेश्वर – नेपाली खपड़ा की गली के भीतर कालिका गली के मोड़ के पास मकान नं0 D 5/133 में।
445. मध्यमेश्वर – मैदागिन के उत्तर, मकान नं0 K 53/63 के सामने मध्यमेश्वर मुहल्ले में।
446. मनः प्रकामेश्वर – साक्षी विनायक के समीप मकान नं0 D 10/50 में।
447. मयूखादित्य – मंगलागौरी के मन्दिर पर मकान नं0 K 24/34 में।
448. मयूखार्कतीर्थ – लक्ष्मणबाला घाट के सामने गंगा जी में। वहीं पर कुण्ड है जिससे किरण नदी का उद्भव माना जाता है।
449. मयूरेश्वर – अस्सी संगम पर मकान नं0 B 2/174 में।
450. मरीचिकुण्ड – चोरुआ तालाब वर्तमान नाम छोहरा तालाब, समीप के मरीचीश्वर लुप्त।
451. मरुकेश्वर – देखि नैर्ऋतेश्वर।
452. मरुत्ततीर्थ – रामघाट तथा अग्नीश्वर घाट के बीच गंगा जी में।
453. महाकालकुण्ड – दुद्धी गड़ही वृद्धकाल के पूर्व में जो अब लुप्तप्राय है।
454. महाकालेश्वर प्रथम – (1) वृद्धकाल के घेरे में वृद्धकाल मन्दिर से पश्चिम में। (2) कालभैरव के पूर्व मकान नं0 K 32/24 में पुनः स्थापना।
455. महाकालेश्वर द्वितीय – महाकालगण द्वारा स्थापित। पुराना स्थान ज्ञानवापी के आग्नेयकोण के पीपल के पास। पुनः स्थापना विश्वनाथ जी के घेरे में वैकुंठेश्वर के पश्चिम के मन्दिर में बड़ाशिवलिंग।
456. महादेव – आदि महादेव के नाम से प्रसिद्ध, त्रिलोचन के पिछवाड़े मकान नं0 A 3/92 में।
457. महादेवकूप – महादेव के प्राचीन स्थान के समीप राजघाट किले के पश्चिम, अब लुप्त। इसको सारस्वत कूप भी कहते हैं।
458. महानादेश्वर – आदि महादेव के मन्दिर में।
459. महापाशुपतेश्वर – नेपाल पशुपति के नाम से प्रसिद्ध, ललिता घाट पर मकान नं0 D 1/67 में।
460. महाबल नृसिंह – कामेश्वर महादेव के घेरे में पुनः स्थापित पहले ओइम्कारेश्वर के पूर्व था, अब लुप्त।
461. महाभयहर नृसिंह – पितामहेश्वर के पश्चिम। शीतला गली में कश्मीरीमल की हवेली के समीप मकान नं0 CK 7/92.
462. महामुण्डाचण्डी – वर्तमान काल में बागीश्वरी देवी को महामुण्डाचण्डी कहा जाता है मकान नं0 J 6/33.
463. महामुण्डेश्वर – वहीं। प्राचीन स्थान ऋणमोचन तीर्थ के समीप था, अब लुप्त।
464. महाराजविनायक – बड़े गणेश नाम से प्रसिद्ध, मकान नं0 K 58/101 लोहटिया के समीप।
465. महारुण्डा – लोलार्क के उत्तर मकान नं0 B 2/17 के समीप से हटाकर अब दुर्गा कुण्ड के मन्दिर में काली जी नाम से.
466. महालक्ष्मी प्रथम – प्राचीन स्थान आदिकेशव के पास, वर्तमान केदारेश्वर के दक्षिण मकान नं0 B 6/99.
467. महालक्ष्मी द्वितीय – लक्ष्मीकुण्ड पर प्रसिद्ध मकान नं0 D 52/40.
468. महालक्ष्मी तृतीय कृत्यकल्पतरु में श्रीदेवी नाम। ओंकारेश्वर के समीप, अब लुप्त। लक्ष्मीकुण्ड पर मकान नं0 D 52/38 में आदि लक्ष्मी के नाम से स्थापित।
469. महालक्ष्मीकुण्ड – लक्ष्मीकुण्ड के नाम से प्रसिद्ध।
470. महालक्ष्मीश्वर – आदि केशव के समीप गंगा जी में।
471. महाश्मशान स्तम्भ – लाटभैरव पर दो स्तम्भ थे- एक महाश्मशान स्तम्भ, दूसरा कुलस्तम्भ। महाश्मशान स्तम्भ लुप्त उसका शीर्ष कालभैरव के समीप मकान नं0 K 32/6 में रखा है और उसके प्रतीक दण्डपाणि भैरव के नाम से मकान नं0 K 31/49 में है।
472. महासिद्धिकुण्ड – इसके सम्बन्ध में अनिश्चिय है। सम्भवतः भवनिया पोखरी। समीप के इन्द्रेश्वर ही महासिद्धिश्वर है।
473. महिषासुर तीर्थ – प्रह्लाद घाट के कुछ उत्तर गंगा जी में।
474. महेश्वर (शूलटंक) – प्रथम स्थान ज्ञानवानी के नैर्ऋत्यकोण के पीपल के पास। वर्तमान शूलटंकेश्वर नाम से दशाश्वमेध पर और महेश्वर पर मणिकर्णिका घाट पर।
475. महोत्कटेश्वर – कामेश्वर महादेव के घेरे में मकान नं0 A 2/9.
476. मंगलतीर्थ – लक्ष्मणबाला घाट के सामने गंगा जी में।
477. मंगलविनायक – मंगलागौरी के मन्दिर में, मकान नं0 K 24/34.
478. मंगलागौरी – मकान नं0 K 24/34 में प्रसिद्ध।
479. मंगलोद कूप – मकान नं0 K 23/89 में।
480. मण्डविनायक – लक्ष्मीकुण्ड पर मकान नं0 D 52/38 में।
481. मंदाकिनी तीर्थ – मैदागिन का पोखरा। प्रसिद्ध।
482. मातृकुण्ड – पितरकुण्डा के समीप माताकुण्ड के नाम से विख्यात, सम्भवतः सिद्धपुर के बिन्दु सरोवर का भी प्रतीक है।
483. मातृतीर्थ – दशाश्वमेध पर शीतला जी के मन्दिर के पास, अब लुप्त।
484. मातरः – दशाश्वमेध के शीतला मन्दिर की देवियां।
485. मातलीश्वर – काशीखण्ड में इसका नाम मालतीश्वर है। वृद्धकाल के घेरे में मकान नं0 K 52/39.
486. मानसरोवर तीर्थ – मानसरोवर तालाब। प्रसिद्ध, परन्तु अब लुप्त।
487. मार्कण्डेय तीर्थ – इस नाम के काशी में दो तीर्थ हैं (1) पंचगंगा घाट पर गंगा जी में (2) ललिताघाट के दक्षिण तथा चौसंट्ठी घाट के उत्तर गंगा जी में।
488. मार्कण्डेयेश्वर – इनके तीन स्थानों का उल्लेख आता है जिनमें दो लुप्त हैं। वर्तमान एक स्थान ढुंढिराज गली में दण्डपाणि मन्दिर के बगल में मकान नं0 CK 36/10.
489. मालतीश्वर – देखिये मातलीश्वर।
490. माहेश्वरी देवी – विश्वनाथ जी की कचहरी के गलियारे में उत्तर की दीवार में।
491. मान्धाता तीर्थ – ललिता घाट के समीप कुण्ड, अब लुप्त।
492. मान्धात्रीश्वर – मोक्षद्वारेश्वर के समीप मकान नं0 CK 34/14 में।
493. मित्रविनायक – आत्मावीरेश्वर के घेरे में मकान नं0 CK 7/158.
494. मुकुटकुण्ड – गोवाबाई का कुण्ड नवाबगंज में, ऐसा प्रसिद्ध मत है। दूसरा मत यह है कि यह कुण्ड कमच्छा के समीप कहीं पर है।
495. मुकुटेश्वर – गोवाबाई के कुण्ड पर, लुप्त। कुछ दिनों पहले तक थे। एक मान्यता कमच्छा पर।
496. मुक्तितीर्थ – मणिकर्णिका घाट के समीप गंगा जी में।
497. मुखनिर्मालिकागौरी – गायघाट के ऊपर हनुमान जी के मन्दिर में।
498. मुखप्रेक्षणी देवी – मंगलागौरी मन्दिर में उसके उत्तर पास में ही, मकान नं0 K 24/34.
499. मुचकुन्देश्वर – गोदौलिया पर बड़ा देव के नाम से, मकान नं0 D 37/40.
500. मुण्डविनायक – सदर बाजार में चण्डीश्वर के मन्दिर में।
501. मृत्वीश – पुराना नाम अपमृत्युहरेश्वर, अब मृत्युन्जय नाम से प्रसिद्ध मकान नं0 K 52/39.
502. मैत्रावरुणतीर्थ – अग्नीश्वर घाट से उत्तर गंगा जी में।
503. मोदक प्रिय विनायक – आदिमहादेव में त्रिलोचन के समीप।
504. मोदविनायक – काशी करवट में, मकान नं0 CK 31/32.
505. मोक्षद्वार – मोक्षद्वारेश्वर के समीप का गंगाजी का मार्ग।
506. यमादित्य – संकठाघाट की सीढ़ी पर, मकान नं0 CK 7/164 में।
507. यमेश्वर – यमघाट पर गंगा तट पर, संकठा घाट के पास।
508. यमुनेश्वर – त्रिलोचन के मन्दिर में।
509. यक्षविनायक – बाबू रुद्रप्रसाद के मन्दिर में मकान नं0 CK 37/29 में। दूसरा मत है कि समीप की ब्रह्मपुरी के कुंए के पास है।
510. यज्ञवाराहकेशव – स्वर्लीनेश्वर के समीप मकान नं0 A 11/29 की दीवार में। पुनः स्थापना मीरघाट के मकान नं0 D 3/79.
511. यज्ञवाराहतीर्थ – राजघाट के किले के सामने राजघाट के कुछ उत्तर-पूर्व की ओर गंगा जी में।
512. यज्ञोदकूप – ओंकारेश्वर के टीले के ईशानकोण में वर्तमान, अन्य नाम अघोरोदकूप भी है।
513. याज्ञवल्क्येश्वर – संकठा जी की मन्दिर की दीवार में सीमा विनायक व सेना विनायक के मध्य।
514. योगिनीतीर्थ – चौसट्ठी घाट तथा राणामहल घाट के सामने गंगा जी में।
515. योगिनीपीठ – राणामहल में जहां चौंसठ योगिनियां स्थापित थीं।
516. रत्नेश्वर – वृद्धकाल की सड़क पर बीच में। मकान नं0 K 53/40.
517. राजपुत्रविनायक – राजघाट के किले के भीतर सड़क के दक्षिण में।
518. राजराजेश्वरइनके इस समय तीन स्थान हैं। (1) आदिम स्थान घुंघरानी गली में सड़क पर मकान नं0 CK 39/57. (2) स्वर्गद्वारी पर मकान नं0 CK 10/16 के चबूतरे के नीचे, (3) ढुंढिराज गली में मकान नं0 CK 35/33 में।
519. रामकुण्डलक्सा मुहल्ले में, प्रसिद्ध।
520. रामतीर्थ रामघाट के सामने गंगा जी में।
521. रामेश्वरइनके पांच स्थान हैं– (1) वीर रामेश्वररामघाट पर, (2) रामकुण्ड पर मकान नं0 D 55/125 में, (3) हनुमान घाट पर मकान नं0 B 4/43 में, हनुमान जी के घेरे में, (4) मानमन्दिर घाट के ऊपर सोमेश्वर मन्दिर के पास मकान नं0 D 16/34 के निकट, (5) पंचकोशी मार्ग पर वरुणा के किनारे। पहले और पांचवें स्वतंत्र हैं परन्तु दूसरे, तीसरे चौथे एक ही देवता की भिन्नभिन्न कालों का पुर्नस्थापना का स्वरूप हैं जिनमें चौथे अपने प्राचीन स्थान के समीप हैं।
522. रुद्रसरोवर तीर्थ अहिल्याबाई घाट के सामने गंगा जी में।
523. रुद्रवासकुण्डसुग्गी गड़ही का प्राचीन नाम, मच्छोदरी के उत्तर में।
524. रुद्रावासतीर्थमणिकर्णिका घाट पर गंगा जी में।
525. रुद्रावासेश्वरमणिकर्णिकेश्वर के दक्षिण, चक्रपुष्करिणी से सटे हुए, बहुधा बालू के नीचे।
526. रुद्रेश्वरत्रिपुराभैरवी के मन्दिर के पास मकान नं0 D 5/21 में।
527. रुद्रेश्वर द्वितीयसुग्गी गड़ही के तट पर अब लुप्त।
528. रुरुभैरवहनुमान घाट पर (1) मकान नं0 B 4/16 में, (2) गोमठ की दीवार में मकान नं0 CK 8/21.
529. रेवातीर्थवर्तमान रेवड़ी तालाब।
530. रेवन्तेश्वरबिन्दुमाधव घाट की सीढ़ियों के ऊपर फाटक के पास छोटे शिवाले में।
531. लकुलीश्वरमहादेव के आदिम स्थान के दक्षिण में अब लुप्त। इनकी एक आधुनिक मूर्ति नेपाल पशुपति मन्दिर के द्वार पर स्थापित है। ललिताघाट मकान नं0 D 1/67 में भी।
532. ललितागौरीललिताघाट पर मकान नं0 D 1/67 में, पूर्व स्थान विशालाक्षी के दक्षिण में था।
533. ललितातीर्थललिताघाट पर गंगा केशव के सम्मुख गंगा जी में।
534. लक्ष्मणेश्वरहनुमान घाट पर मकान नं0 B 4/44.
535. लक्ष्मीतीर्थवर्तमान लक्ष्मीकुण्ड।
536. लक्ष्मीनृसिंहराज मन्दिर में मकान नं0 K 20/159.
537. लक्ष्मीनृसिंहतीर्थ राजघाट के किले के सामने गंगा जी में पश्चिम की ओर।
538. लांगलीश्वरवर्तमान स्थान खोवा बाजार में मकान नं0 CK 28/4 में।
540. लोलार्कभदैनी मुहल्ले में प्रसिद्ध।
541. लोमशेशवृद्धकाल के घेरे में मकान नं0 K 52/39.
542. वक्रतुण्डविनायकसरस्वती विनायक नाम से भी प्रसिद्ध। चौसट्ठी घाट के समीप मकान नं0 D 20/4.
543. वरूणा वर्तमान वरुणा नदी।
544. वरूणासंगमआदिकेशव के समीप गंगा तथा वरूणा का संगमस्थल।
545. वरदविनायकप्रह्लाद घाट की सड़क पर मकान नं0 A 13/19 के बाहर।
546. वराहेश्वर(1) सिद्धेश्वरी मन्दिर में अपने प्राचीन स्थान के समीप, (2) दशाश्वमेध घाट पर मकान नं0 D 17/111 में।
547. वरुणेश्वर प्रथम ढुंढिराज गली में मकान नं0 CK 36/10 में। काशीखण्ड में इनका नाम करुणेश्वर कहा गया है।
548. वरुणेश्वर द्वितीयसिद्धिविनायक के ऊपर मकान नं0 CK 8/8 में।
549. वशिष्टऋषिसिन्धिया घाट के ऊपर वशिष्टघाट वामदेव मन्दिर में मकान नं0 CK 7/161.
550. वशिष्टतीर्थदशाश्वमेध घाट के दक्षिण चौंसट्ठी घाट के पहले गंगा जी में।
551. वशिष्टेश्वर प्रथम – (1) ललिताघाट गंगादित्य के पास मकान नं0 D 1/67 में,(2) सिन्धियाघाट पर वशिष्ट वामदेव मन्दिर में मकान नं0 CK 7/161.
552. वशिष्टेश्वर द्वितीयवरूणासंगम के पूर्व उस पार।
553. वामदेव ऋषि शिवलिंग रूप में वामदेवेश्वर का पूजन होता है। पहले इनकी ऋषि रूप में मूर्ति थी जो अब लुप्त है। वर्तमान मन्दिर मकान नं0 CK 7/161.
554. वामदेवेश्वरसिन्धियाघाट पर ऊपर मकान नं0 CK 7/161.
555. वामनकेशवइस समय त्रिलोचन के समीप मधुसूदन नाम से प्रसिद्ध, मकान नं0 A 2/29 प्राचीन स्थान आदिकेशव के समीप।
556. वामनतीर्थराजघाट के किले के दक्षिण गंगा जी में।
557. वायुकुण्ड भुलेटन पर स्थित गड़ही।
558. वाराणसीदेवीवर्तमान स्थान त्रिलोचन मन्दिर में।
559. वाराहीदेवी मानमन्दिर घाट के उत्तर मकान नं0 D 16/84 में।
560. वाल्मीकीश्वरत्रिलोचन मन्दिर में।
561. वासुकिकुण्ड नागकुँआ के समीप, अब लुप्त।
562. वासुकीश्वर – (1) आत्मावीरेश्वर के समीप मकान नं0 CK 7/155 में, (2) नारदघाट के ऊपर नारदेश्वर के सामने मकान नं0 D 25/11 में।
563. विकटद्विजविनायकधूपचण्डी देवी के मन्दिर में पीछे की ओर, मकान नं0 J 12/134.
564. विकटामातृका – (1) आत्मावीरेश्वर मन्दिर की कात्यायिनी दुर्गा, (2) संकटा जी पर मकान नं0 CK 7/159 में। दोनों स्थान नवीन हैं प्रथम स्थान स्वर्लीनेश्वर के उत्तर में था।
565. विघ्ननायकगणेश विश्वनाथ के घेरे में पार्वती देवी के मन्दिर में पश्चिमी की दीवार में। प्राचीन मूर्ति खण्डित हो जाने पर नई संगमरमर की मूर्ति स्थापित हुई है।
566. विघ्नराजविनायक चित्रकूट के तालाब पर, मकान नं0 J 12/32.
567. विघ्नहरकुण्डअमरैया ताल के समीप, अब लुप्त। विघ्नहर्ता गणेश भी अब लुप्त।
568. विघ्नेश्वरतीर्थवीरेश्वर तीर्थ तथा हरिश्चन्द्र तीर्थ के मध्य गंगा जी में। हरिश्चन्द्रश्वर के उत्तर संकठा घाट के सामने। वहाँ के गणेश की मूर्ति संकठा जी के मन्दिर में है।
569. विजयलिंगविश्वनाथ जी के घेरे में निकुम्भ के समीप।
570. विटंकनरसिंहकेदारेश्वर के मन्दिर में मकान नं0 B 6/102.
571. विदारनरसिंहप्रह्लाद घाट पर मकान नं0 A 10/82 में।
572. विदारनरसिंह तीर्थराजघाट के किले के मध्य भाग के सामने गंगा जी में।
573. विद्येश्वर नीमवाली ब्रह्मपुरी में मकान नं0 CK 2/41 में।
574. विधि तीर्थविधीश्वर के पास, अगस्त्य कुण्डा में अगस्त्येश्वर के पूर्व गली के मोड़ पर।
575. विधि देवीविधीश्वर के समीप।
576. विधीश्वरअगस्त्येश्वर के आग्नेयकोण में अगस्त्यकुण्डा पर।
577. विनतेश्वरकामेश्वर मन्दिर के द्वार पर खखोल्कादित्य के समीप मकान नं0 A 2/9 में।
578. विमलादित्यजंगमवाड़ी में खारी कुँआ के पास मकान नं0 D 35/273 में हरिकेशेश्वर के समीप।
579. विमलेश्वरनया महादेव मुहल्ले में नीलकंठ नाम से प्रसिद्ध मकान नं0 A 10/47.
580. विमलोदककुण्ड ओंकारेश्वर के नैर्ऋत्यकोण में नवगुतुरी गड़ही। समीप के विमलेश्वर तथा भृगोरायतन लुप्त।.
581. विरूपाक्षविश्वनाथ के घेरे में शनैश्चरेश्वर के पूर्व प्राचीन बड़ा शिवलिंग।
582. विरूपाक्षीगौरीविश्वनाथ के घेरे में नैर्ऋत्यकोण के छोटे मन्दिर में।
583. विशालतीर्थ विशालाक्षी के पीछे गंगा जी में।
584. विशालाक्षीगौरीमीरघाट मुहल्ले में मकान नं0 D 3/85 में।
585. विशालाक्षीश्वरवहीं।
586. विश्वकर्मेश्वर प्रथमस्ट्रीथफील्ड रोड पर ग्वालगड़हे के पास मकान नं0 A 34/61 में।
587. विश्मकर्मेश्वर द्वितीयआत्मावीरेश्वर के समीप वृहस्पतिश्वर के मन्दिर में CK 7/133 में।
588. विश्वतीर्थमणिकर्णिकाघाट के सामने गंगा जी मे।
589. विश्वभुजागौरी सिद्धिविनायक के पिछवाड़े।
590. विश्वावस्वीश्वर (अथवा विश्वावसुलिंग)अगस्त्येश्वर के मन्दिर में सुतीक्ष्ण की मूर्ति के नाम से प्रख्यात मुखलिंग मकान नं0 D 36/11 में।
591. विश्वदेवेश्वरमध्यमेश्वर के दक्षिण शिवाले में, मकान नं0 K 53/63 के सामने।
592. विश्वेश्वर प्रथमप्रथम स्थान रजिया की मस्जिद में मकान नं0 CK 38/5, तत्पश्चात् ज्ञानवापी मस्जिद के स्थान पर और अब मकान नं0 CK 35/19 में, प्रसिद्ध।
593. विश्वेश्वर द्वितीयशुद्ध नाम चित्रेश्वर जो लिपिप्रमाद से किसी समय विश्वेश्वर हो गया (कृत्यकल्पतरुतीर्थ विवेचन काण्ड पृष्ठ 72) मकान नं0 K 54/133 दारानगर में।
594. विष्णु ज्ञानवापी के विश्वेश्वर मन्दिर के मुख्य मंडप में स्थित विष्णुभगवान की मूर्ति जो अब विश्वनाथ जी के मन्दिर के नैर्ऋत्यकोण में विरूपाक्षी मन्दिर में रखी है।
595. विष्णु तीर्थमणिकर्णिका घाट के समीप गंगा जी में।
596. वीर तीर्थसंकटा घाट के आसपास गंगा जी में।
597. वीरभद्रेश्वर प्रथममध्यमेश्वर के दक्षिण के शिवाले में मकान नं0 K 53/63 के सामने।
598. वीरभद्रेश्वर द्वितीयज्ञानवापी मस्जिद के वायव्यकोण में स्थान, अब लुप्त।
599. वीरमाधवआत्मावीरेश्वर के बाहरी दीवार के आले की छोटी मूर्ति मकान नं0 CK 7/158.
600. वीरेश्वरआत्मावीरेश्वर नाम से प्रसिद्ध, मकान नं0 CK 7/158.
601. वृद्धकालेश्वरवृद्धकाल मुहल्ले में मकान नं0 K 32/39 में, प्रसिद्ध।
602. वृद्धादित्य मीरघाट पर मकान नं0 D 3/16 में। समीप में ही गंगा जी में वृद्धार्क तीर्थ।
603. वृषभध्वज कपिलधारा के समीप प्रसिद्ध।
604. वृषभेश्वरवर्तमान स्थान गोरखनाथ के टीले पर मकान नं0 K 58/78.
605. वृषरुद्रहरतीरथ के पश्चिम तट पर वर्तमान मन्दिर में मूर्ति रखी है, मकान नं0 K 46/147.
606. वेदेश्वर आदिकेशव पर।
607. वैकुण्ठमाधवसिन्धिया घाट के ऊपर मकान नं0 CK 7/165.
608. वैतरणीदीर्घिकासुग्गी गड़ही के समीप अब लुप्त। वर्तमान काल में लाटभैरव के पूरब थोड़ी दूर पर एक झील।
609. वैद्यनाथकोदई की चौकी के सामने मकान नं0 D 50/20.
610. वैद्येश्वरकुण्डअब लुप्त। प्रतीक रूप में वृद्धकाल के मन्दिर में अमृतकुण्ड नाम से, मकान नं0 K 52/39.
611. वैरोचनेश्वरसीमा विनायक के पीछे गली में प्राचीन शिवलिंग, पुनः स्थापित।
612. व्याघ्रेश्वरभूतभैरव मुहल्ले में मकान नं0 K 63/16.
613. व्यासकूपकर्णघण्टा तालाब के पूर्वी तट पर, मकान नं0 K 60/67.
614. व्यासेश्वर प्रथमवहीं पर तालाब के दक्षिण मन्दिर में जो अब जलमग्न है।
615. व्यासेश्वर द्वितीयविश्वनाथ जी के गर्भगृह के उत्तर। भोग अन्नपूर्णा के दक्षिण द्वार के पास (सौरपुराण)
616. शक्रेश्वरमणिकर्णिका पर, इन्द्रेश्वर नाम से प्रसिद्ध।
617. शतकालेश्वर वर्तमान में ठठेरी बाजार में पीतल के शिवाले में गर्त में मकान नं0 CK 17/24 के पास।
618. शनैश्चरेश्वर विश्वनाथ जी के घेरे में मन्दिर के नैर्ऋत्यकोण में पीतल की जलहरी में।
619. शशिभूषणलिंगपापमोचनेश्वर नाम से पापमोचन पोखरे के समीप, ऋणमोचन के पूर्व।
620. शत्रुध्नेश्वरहनुमान घाट पर मकान नं0 B 4/44 में।
621. शंकुकर्णेश्वरशंखु धारा मुहल्ले में मकान नं0 B 22/120 के सामने।
622. शंख तीर्थआदिकेशव के सामने गंगा जी में।
623. शंखमाधववर्तमान शीतला घाट पर मढ़ी में।
624. शंखमाधव तीर्थ राजघाट के किले के सामने गंगा जी में।
625. शंखोद्धार तीर्थ शंखुधारा का तालाब, प्रसिद्ध।
626. शालकटंकटविनायकमँडुवाडीह में तालाब के उत्तर प्रसिद्ध।
627. शान्तन्वीश्वरत्रिलोचन घाट पर नीचे की मढ़ी में बड़ा शिवलिंग। शान्तेश्वर नाम से भी प्रसिद्ध।
628. शान्तिकरीगौरीवर्तमान मढ़ियाघाट और ककरहाघाट के बीच वरूणा तट पर पुर्नस्थापित।
629. शिखिचण्डी लक्ष्मीकुण्ड पर महालक्ष्मी मन्दिर में पूर्वाभिमुखी देवी। मकान नं0 D 52/40.
630. शिवदूती – (1) स्वर्लीनेश्वर के समीप (2) मीरघाट पर हनुमान मन्दिर में।
631. शिवेश्वरविश्वेश्वरगंज में मकान नं0 K 44/33 में।
632. शिवेश्वरकुण्ड अथवा शैव तड़ागइसका नाम हालू गड़हा था। सन् 1822 0 तक यह था (प्रिन्सेप का नक्शा) इसको पाटकर विश्वेश्वरगंज बाजार बसाया गया।
633. शुकेशकाशी गोशाला के पश्चिमी फाटक के बगल की कोठरी में मकान नं0 K 40/20.
634. शुक्रकूप कालिका गली में मकान नं0 D 8/30 के सामने।
635. शुक्रेश्वर कालिका गली में मकान नं0 D 8/30.
636. शुष्केश्वरकेदारेश्वर की अन्तर्गृह यात्रा में शुक्रेश्वर नाम से पूजित, मकान नं0 B 1/185.
637. श्रृंगारगौरीज्ञानवापी के विश्वेश्वर मन्दिर के श्रृंगार मंडप में। लुप्त। अब अन्नपूर्णा नाम से विश्वनाथ मन्दिर में ईशानकोण में। ज्ञानवापी के मस्जिद के पश्चिमी भाग में जो बीच का द्वार बन्द है उसके सामने इनका स्थान पूजन होता है।
638. शेषमाधववर्तमान स्थान राज मन्दिर में मकान नं0 K 20/137.
639. शेष तीर्थराजघाट से कुछ दूर ईशानकोण में गंगा जी में।
640. शैलाद तीर्थइसका नाम नंदि तीर्थ भी है मणिकर्णिकाघाट के समीप।
641. शैलेश्वरमढ़िया घाट पर शैलपुत्री दुर्गा के मन्दिर में।
642. शैलेश्वरीदेखिये शैलपुत्री।
643. शौनककुण्ड बड़ेगणेश के उत्तर नई बस्ती में 1822 0 में था अब लुप्त समीप के शौनकेश्वर भी लुप्त।
644. श्रीकंठलिंगलक्ष्मीकुण्ड पर मकान नं0 D 52/38 में।
645. श्रीमुखीगुहाओंकारेश्वर के टीले के नीचे अब उसका द्वार बन्द हो गया है। लुप्त।
646. श्रुतीश्वररत्नेश्वर से मिले हुए उत्तर के मन्दिर में मकान नं0 K 53/40.
647. श्वेतद्वीप तीर्थआदिकेशव का मन्दिर जिस स्थान पर है, उसका नाम।
648. श्वेतमाधव मीरघाट पर हनुमान जी के मन्दिर में मकान नं0 D 3/79.
649. श्वेतेश्वरपांचों पाण्डवों के मन्दिर में मकान नं0 CK 28/10.
650. शडानन प्रथममणिकर्णिका पर तारकेश्वर के पूर्व, अब लुप्त।
651. षडानन द्वितीयसतीश्वर मन्दिर में अब लुप्त। भग्नमूर्ति कालभैरव मन्दिर में है।
652. षडानन तृतीय आदिमहादेव के पश्चिम स्कन्देश्वर में। लुप्त। इनकी गुप्तकालीन मूर्ति भारत कलाभवन में है।
653. सगरेश्वरसंकटा जी के मन्दिर में मकान नं0 CK 7/159.
654. सतीश्वरइन्हीं का नाम दाक्षायिणीश्वर है रत्नेश्वर के पूर्व मकान नं0 K  46/32 में।
655. सप्तसागरतीर्थअब लुप्त। इसे पाटकर इसी स्थान पर सप्तसागर मुहल्ला बसा है।
656. समुद्रेश्वर बांसफाटक के दक्षिण सड़क पर ही छोटे मन्दिर में मकान नं0 CK 37/32 के बाहर।
657. सर्वेश्वर पाण्डेय घाट पर लक्ष्मीनारायण के ऊपर।
658. सरस्वती देवी गोमठ के समीप मकान नं0 CK 7/109 में नील सरस्वती नाम से प्रसिद्ध। नीचे गंगा जी में सारस्वत तीर्थ।
659. सरस्वतीश्वर त्रिलोचन घाट पर हिरणगर्भेश्वर के पास।
660. संगमेश्वरआदिकेशव के पूर्व वरूणासंगम।
661. संनिहत्यातीर्थ – (1) कुरुक्षेत्र का तालाब (2) सोनहटिया गड़ही।
662. संवर्त्तेश्वरपांचों पाण्डव मन्दिर में मकान नं0 CK 28/10.
663. संहारभैरववर्तमान स्थान पाटन दरवाजे के पास मकान नं0 A 1/83.
664. सारस्वतकूपदेखिये महादेव कूप।
665. सारस्वततीर्थ मणिकर्णिका घाट पर गोमठ के सामने गंगा जी में।
666. सांख्यतीर्थराजघाट के सामने गंगा जी में सांख्येश्वर अब लुप्त।
667. साम्बादित्य सूर्यकुण्ड मुहल्ले में कुण्ड के तट पर मन्दिर।
668. साम्बादित्यकुण्डसूर्यकुण्ड नाम से प्रसिद्ध, औरंगाबाद के पास।
669. सिद्धकूटवागेश्वर के चारों ओर का ऊंचा स्थान।
670. सिद्ध्यष्टकेश्वरबड़े गणेश पर मकान नं0 K 58/103.
671. सिद्ध्यष्टककुण्डगणेश गड़ही नाम से प्रसिद्ध इस स्थान पर हरिश्चन्द्रकालेज बन गया।
672. सिद्धयोगेश्वरी सिद्धेश्वरी मुहल्ले में इसी नाम से प्रसिद्ध मकान नं0 CK 7/124.
673. सिद्धृलक्ष्मीदेवीमणिकर्णिका घाट पर सिद्धिविनायक के पिछवाड़े।
674. सिदध्वापी वागेश्वर मन्दिर के दक्षिण, अब लुप्त।
675. सिद्धिविनायक मणिकर्णिका पर अमेठी मन्दिर के पास मकान नं0 CK 9/1.
676. सिद्धेश्वर प्रथमसिद्धकूट पर वर्तमान वागेश्वरी के दक्षिण मकान नं0 J 6/84.
677. सिदृधेश्वर द्वितीय कुरुक्षेत्र के समीप मकान नं0 B 2/282.
678. सिंहतुण्डविनायक बालमुकुन्द के चौहट्टा में ब्रह्मेश्वर मन्दिर में, मकान नं0 D 33/66-67.
679. सीतेश्वरहनुमान घाट पर मकान नं0 B 4/42.
680. सीमाविनायकहरिश्चन्द्र के सामने संकटा जी की दीवार में।
681. सुप्रतीक सरोवरकमल गड़हा।
682. सुमन्त्रादित्य हनुमान फाटक पर तुलसीदास जी के हनुमान मन्दिर में।
683. सुमन्त्वीश्वरउसी मन्दिर में।
684. सुमुखविनायकनेपाली खपड़ा की गली में मकान नं0 CK 35/8.
685. सुमुखेश्वरत्रिलोचन पर पादोदक कूप के समीप मकान नं0 A 3/87.
686. सूक्ष्मेश्वर धूपचण्डी देवी के मन्दिर में पिछवाड़े विकटद्विज विनायक के सामने मकान नं0 J 12/134.
687. सृष्टिविनायककालिकागली में मकान नं0 D 8/3 के बाहर की दीवार में।
688. सेनाविनायकसंकठा जी के मन्दिर की बाहरी की दीवार में हरिश्चन्देश्वर के सामने सीमाविनायक के पास।
689. सोमेश्वरवर्तमान दो स्थान (1) मानमन्दिर घाट पर मकान नं0 D 16/34 के पास, प्रसिद्ध (2) पाण्डेय घाट के ऊपर।
690. सौभाग्यगौरीवर्तमान आदिविश्वेश्वर मन्दिर उत्तर की कोठरी में मकान नं0 CK 38/8.
691. स्कन्दतीर्थमणिकर्णिका पर मणिकेश्वर के पास गंगा जी में।
692. स्कन्देश्वरआदि महादेव के समीप अब लुप्त।
693. स्थाणु कुरुक्षेत्र तालाब के समीप मकान नं0 B 2/247 में।
694. स्थूलजंघविनायक – (1) रानीकुंआ पर छोटे मन्दिर में चित्रघण्ट विनायक के पास मकान नं0 CK 23/25 के बाहर (2) पशुपतीश्वर मन्दिर में मकान नं0 CK 13/66.
695. स्थूलदन्तविनायक मानमन्दिर मुहल्ले में सोमेश्वर के द्वार पर मकान नं0 D 16/34 के पास।
696. स्वप्नेश्वर – (1) शिवालाघाट के समीप, प्रसिद्ध (2) लोलार्क के उत्तर मकान नं0 B 2/33 में।
697. स्प्नेश्वरीवहीं स्वप्नेश्वर के पास।
698. स्वयंभूलिंगरामकुण्ड के पास लक्सा मुहल्ले में मकान नं0 D 54/114 के बाहर।
699. स्वर्गद्वारस्वर्गद्वारी मुहल्ले में विश्वनाथ सिंह के मकान नं0 CK 10/16 के सामने।
700. स्वर्गद्वारेश्वरवहीं मकान नं0 CK 10/16 में।
701. स्वर्णाक्षेश्वरढुंढिराज गली में दण्डपाणि के मन्दिर में मकान नं0 CK 36/10.
702. स्वर्लीनतीर्थस्वर्लीनेश्वर के सामने गंगा जी में प्रह्लाद घाट के उत्तर पूर्व।
703. स्वर्लीनेश्वरनया महादेव के नाम प्रसिद्ध पह्लाद घाट के पूर्व मकान नं0 A  11/29.
704. हनुमदीश्वरवर्तमान स्थान हनुमानघाट पर मढ़ी में। मढ़ीध्वस्त हो जाने से शिवलिंग घाट पर ही रखा हुआ है।
705. हयकण्ठीदेवीलक्ष्मीकुण्ड पर। कालीमठ में मकान नं0 D 52/35 में खिन्नी के पेड़ के नीचे।
706. हयग्रीवकेशवभदैनी में। माँ आनन्दमयी अस्तपताल के पास।
707. हयग्रीवतीर्थ हयग्रीवकेशव के समीप का गड़हा जो अब भर जाने से लुप्त हो गया है।
708. हरसिद्धीदेवी मणिकर्णिका घाट पर सिद्धिविनायक के पूर्व।
709. हरंपापतीर्थ केदारघाट के सामने गंगा जी में। प्रतीक रूप से गौरी कुण्ड नाम से केदार घाट का कुण्ड। प्राचीन हरंपापतीर्थ हरिश्चन्द्रघाट के सामने है जिसे आदि मणिकर्णिका भी कहते हैं।
710. हरिकेशेश्वरजंगमवाड़ी में मकान नं0 D 35/273 में।
711. हरिश्चन्द्रतीर्थसिन्धियाघाट के उत्तर हरिश्चन्द्रेश्वर के नीचे गंगा जी में।
712. हरिश्चन्द्रमण्डप हरिश्चन्द्रेश्वर का वर्तमान मन्दिर, मान्यता है कि धर्मराज ने राजा हरिश्चन्द्र को यहीं दर्शन दिया था मकान नं0 CK 7/166.
713. हरिश्चन्द्रविनायकउक्त मण्डप के बगल में मकान नं0 CK 7/165.
714. हरिश्चन्द्रेश्वर पुष्पदन्तेश्वर के समीप।
715. हस्तिपालेश्वरवृद्धकाल मन्दिर में मकान नं0 52/39.
716. हंसतीर्थ प्रथमविश्वेश्वरगंज के उत्तर हरतीरथ का पोखरा।
717. हंसतीर्थ द्वितीयदेखिये हरंपाप तीर्थ।
718. हिरण्यकूपराजघाट के किले में राजपुत्र विनायक के समीप का कुँआ, सड़क के दक्षिण।
719. हिरण्यगर्भतीर्थप्रह्लादघाट तथा त्रिलोचन घाट के बीच गंगा जी में।
720. हिरण्यगर्भलिंगत्रिलोचनघाट के ऊपर मढ़ी में।
721. हुण्डनमुण्डनगण – (1) शैलपुत्री दुर्गा के मन्दिर में मठियाघाट पर, (2) धूपचण्डी देवी के मन्दिर में। पिछवाड़े की ओर। वहीं हुण्डनेश तथा मुण्डनेश। मकान नं0 J 12/134.
722. हुण्डनेशमुण्डनेश (1) शैलपुत्री दुर्गा के मन्दिर में, (2) धूपचण्डी के मन्दिर में पीछे की ओर। मकान नं0 J 12/134.
723. हेरम्बविनायकलहुराबीर के चौमुहानी से पश्चिम। पिशाचमोचन की सड़क के उत्तर वाल्मीकि टीले के ऊपर।
724. क्षिप्रसादविनायकपितरकुण्डा तालाब के पास पित्रीश्वर के मन्दिर में, मकान नं0 C 18/47.
724. क्षीराब्धितीर्थआदिकेशव के सामने गंगा जी में।
725. क्षेमकगणक्षेमेश्वरमन्दिर में। मकान नं0 B 14/12 में।
726. क्षेमेश्वरमकान नं0 बी0 14/12 कुमारस्वामीमठ, क्षेमेश्वर घाट के ऊपर।
727. क्षोणीवाराहदशाश्वमेध घाट पर मकान नं0 D 17/111 में।
728. क्षोणीवाराहतीर्थ समीप में। लुप्त।
729. त्रिपुरान्तकेश्वरसिगरा में त्रिपुरान्तक टीले पर। मकान नं0 D 59/95.
730. त्रिपुरेश्वरत्रिपुराभैरवी मन्दिर में। मकान नं0 5/24.
731. त्रिभुवनकेशव – (1) बन्दीदेवी के मन्दिर में दशाश्वमेधघाट के ऊपर मकान नं0 D 17/100. वहीं पर त्रिभुवनकेशवतीर्थ अब लुप्त। (2) वृद्धकाल मन्दिर के दालान में।
732. त्रिमुखविनायकसिगरा में त्रिपुरान्तकेश्वर के टीले पर। मकान नं D 95/95.
733. त्रिलोकसुन्दरीदेवी शीतला गली में पितामहेश्वर के द्वार पर शीतलादेवी। मकान नं0 CK 7/92.
734. त्रिलोचनप्रसिद्ध। त्रिलोचन घाट के ऊपर। मकान नं0 A 2/80.
735. त्रिविक्रमत्रिलोचनमन्दिर में। मकान नं0 A 2/80.
736. त्रिशूली क्रींकुण्ड पर बाबा कीनाराम की बैठक के पास। लुप्त।
737. त्रिसन्ध्यतीर्थदशाश्वमेध के दक्षिण गंगाजी में।
738. त्रिसन्ध्येश्वरवर्तमान स्थान ललिताघाट पर मकान नं0 D 1/40 में।
739. त्र्यम्बकत्रिलोचन नाम से प्रसिद्ध। मकान नं0 D 38/21 बड़ादेव मुहल्ले में।
740. ज्ञानकेशवआदिकेशव की बगल मेंइनके ही स्थान पर श्वेतद्वीप तीर्थ है।
741. ज्ञान तीर्थगंगाजी में मणिकर्णिका घाट के सामने।
742. ज्ञानमाधवज्ञानवापी के पास पांचोपाण्डवमन्दिर में। मकान नं0 CK 28/10.
744. ज्ञानवापीविश्वनाथ जी के उत्तर। प्रसिद्ध।
745. ज्ञानविनायकलांगलीश्वर मन्दिर में बाहर की कोठरी में। मकान नं0 CK 28/4.
746. ज्ञानह्रद तीर्थ पंचगंगा के दक्षिण गंगाजी में। ऊपर ज्ञानेश्वर थे, वे लुप्त हैं।
747. ज्ञानेश्वर प्रथमपंचगंगा घाट के दक्षिण लुप्त।
748. ज्ञानेश्वर द्वितीयलाहौरी टीला में मकान नं0 D 1/32 में।
749. ज्ञानोद तीर्थदेखिये ज्ञानवापी

(पं0 कुबेरनाथ सुकुल की पुस्तक ‘वाराणसी-वैभव’ से साभार.)

 

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