निवेदन ‘काशीकथा‘ बनारस की संस्कृति एवं विरासत को संजोने एवं इंटरनेट के माध्यम से अधिकाधिक पाठकों/जिज्ञासुओं तक इस प्राचीन नगरी की विशिष्टताओं को प्रेषित करने के पुनीत उदेश्य के साथ शुरू किया जा रहा है। यह एक दीर्घकालिक एवं निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है; जिसमें आप सभी के योगदान की आवश्यकता है। समस्त प्रबुद्धजनों से वेबसाइट की विषयवस्तु के संदर्भ में बौद्धिक एवं व्यावहारिक सहयोग की अपेक्षाओं के साथ -
( kashikatha@gmail.com पर आपका सहयोग अपेक्षित है। )
“वाराणसी इतिहास से भी अधिक प्राचीन है, परंपरा की दृष्टि से भी अतिशय प्राचीन है और मिथकों से कहीं अधिक प्राचीन है और यदि तीनों (इतिहास, परंपरा व मिथक) को एक साथ रखा जाये तो यह उनसे दोगुनी प्राचीन है।“ - मार्क ट्वेन
काशीखण्डोक्त काशी के अज्ञात शिव लिंग

काशीखण्डोक्त 524 शिवलिंगों की सूची में 200 अज्ञात है, जिसमे से कुछ  की सूची परिशिष्ट  में दी गई है अर्थात् 324 शिव लिंग अस्तित्व में है।

क्रमांक            शिव लिंग        काशीखण्ड, श्लोक

1.     अदितेश 97.208

2.     आहुतीश 97.103

3.     आज्यपेश्वर     97.162

Read the rest of this entry »

काशीखण्डोक्त काशी के ज्ञात शिव लिंग

क्रमांक  शिव लिंग      काशीखण्ड-श्लोक     वाराणसी में अवस्थिति

1.     अगस्तीश्वर     61.177; 100.81       अगस्तकुण्डा मुहल्ला, गोदौलिया, डी 36/11

2.     अघोरेश्वर       17.87  कामेश्वर, ए 2/21 वृक्ष तले मढ़ी में

3.     आग्नेयेश्वर     17.120 निकटस्थ स्वर्लीनेश्वर, ए 12/2

Read the rest of this entry »

शिव स्वयंभूलिंग: भारत एवं काशी

क्रमांक   शिव ज्योतिर्लिंग    भारत में मूल-स्थान     काशी में अवस्थिति

1.     अविमुक्तेश्वर    चमोली (हिमालय में), उत्तरांचल   ज्ञानवापी, राधाकृष्ण धर्मशाला,सी के 30/1

2.     ओंकारेश्वर      मान्धाता, मध्य प्रदेश     ओंकारेश्वर, पठानी, टोला,ए 33/23

3.     ज्येष्ठेश्वर      ज्येष्ठस्थान, गुजरात      सप्तसागर, कर्णघण्टा, के 62/144

Read the rest of this entry »

शिव ज्योतिर्लिंग: भारत एवं काशी में स्थान

क्रमांक       शिव ज्योतिर्लिंग          भारत में मूल-स्थान        काशी में अवस्थिति

1.     सोमेश्वर               सोमनाथ, गुजरात            सोमेश्वर, मानमन्दिर घाट के समीप डी 16/34

2.     मल्लिकार्जुन      श्रीशैल, आन्ध्र प्रदेश          त्रिपुरान्तकेश्वर, सिगरा (शिवपुरवा) टीला, डी 59/95

3.     महाकालेश्वर        उज्जैन, मध्य प्रदेश           वृद्धकालेश्वर, महामृत्युंजय,के 52/39

Read the rest of this entry »

ओंकारेश्वर एवं कालेश्वर

Omkareshwarओंकारेश्वर – भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग है। काशी में यह ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में है। नाड़ी शास्त्र के स्वर के अनुसार ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग अकार, मकार और ऊकार का सूचक है। काशी खंड के अनुसार इसी लिंग का नाम कपिलेश्वर और नादेश्वर भी है। इनके दर्शन-पूजन से सभी लिंगों की पूजा का फल मिल जाता है। वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को इनकी वार्षिक पूजा और श्रृंगार किया जाता है। इस दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं। साथ ही पूरा माहौल हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठता है।

Kaleshwarकालेश्वर – कालेश्वर लिंग द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक उज्जैन के महाकालेश्वर का प्रतीक हैं। इनका मंदिर वृद्धकाल महामृत्युंजय पर स्थित है। मान्यता के अनुसार यह लिंग महामृत्युंजय रूप हैं। इनकी पूजा से रोगों से छुटकारा और अपमृत्यु का निवारण होता है।

अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी : काशीकथा-2016 (21वीं सदी में काशी).

न हो खिलवाड़ बनारस के अतीत से, बनारस बने Edu City – धर्मशील चतुर्वेदी

  • काशी की चिकित्सा व्यवस्था में सामुदायिक सहभागिता जरूरी – प्रो0 वी0के0 शुक्ल
  • वक्ताओं ने की बनारस की संस्कृति और परम्परा को अक्षुण्ण रखने की वकालत

IMG_1638“राजनीतिक स्थिति का हाल बनारस में किसी से छिपा नहीं है। आज सांसद के वेतन पर पूरी सांसदों की फौज एक साथ मेजें ठोकती है तो वही दूसरी ओर गरीबो की बात पर पूरी की पूरी संसद ठप रहती है। 1956 में जहां 20 लाख विधिक मामले लम्बित थे तो वही आज 2015 में लगभग 3 करोड़ 35 लाख विधिक मामले पूरे भारतवर्ष में लम्बित हैं।

Read the rest of this entry »

अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी : काशीकथा-2016 (21वीं सदी में काशी)

आधुनिकता और परम्परा के समन्वय से समृद्ध होगी काशी – प्रो0 राजीव संगल

  • रामलीला छायाचित्र प्रदर्शनी रहा आयोजन का मुख्य आकर्षण।
  • देश विदेश से आये विद्वानों के साथ खांटी बनारसी विद्वानों ने प्रस्तुत किये विचार।

IMG_0730“काशी को स्मार्ट सिटी के परिपेक्ष्य में चार स्तरों व्यक्ति, परिवार, समाज और प्रकृति के आधार पर समझने की आवश्यकता है। समकालीन समाज में व्यक्ति विश्लेषण के साथ-साथ भूमिका निर्वहन भी आज की महती आवश्यकता है। जिस दिन खुद की भूमिका तय हो जायेगी, प्रौद्योगिकी भी वैश्विक स्तर पर काशी की मदद करने को तैयार होगी।

Read the rest of this entry »

वशिष्ठवामेश्वर महादेव

काशी की इस पावन भूमि पर अनेकों ऋषि महात्मा हुए हैं। काशी में ही वशिष्ठ एवं वामेश्वर ऋषि ने तप किया। सिद्धेश्वरी मोहल्ले में इन्होंने शिवलिंग की स्थापना कर तप किया था अतः इन्हीं के नाम पर वशिष्ठवामेश्वर महादेव नामकरण हैं। सिद्धेश्वरी मोहल्ले में घाट के किनारे स्थित छोटे से मंदिर में वशिष्ठवामेश्वर महादेव स्थापित हैं। मंदिर परिसर में ही वशिष्ठ ऋषि की प्रतिमा भी है।

Read the rest of this entry »

परशुरामेश्वर महादेव

पक्के महाल स्थित नंदन साहू लेन में भगवान शिव के कई मंदिरों का दर्शन हो जाता है। देवादिदेव भगवान शिव के इन प्राचीन मंदिरों को देखकर श्रद्धा एवं आस्था और बलवती हो जाती है। नंदन साहू लेन मोहल्ले में गोला गली के पास परशुरामेश्वर महादेव का मंदिर है। मान्यता है कि परशुराम जी ने इसी स्थान पर शिवलिंग की स्थापना कर तप किया था।

Read the rest of this entry »

उपशांतेश्वर महादेव

देवाधिदेव भगवान शिव उपशांतेश्वर महादेव के रूप में काशी में वास कर श्रद्धालुओं की विपरीत ग्रहों से रक्षा करते हैं। मान्यता है कि प्राचीन काल में उपशांत मुनि ने शिवलिंग की स्थापना की थी। इन्हीं के नाम पर इनका नाम उपशांतेश्वर महादेव हो गया। कहा जाता है कि किसी भी प्रकार का ग्रह हो उपशांतेश्वर महादेव के दर्शन मात्र से उस ग्रह से शांति हो जाती है। इनके दर्शन से मूल की शांति, पंचक की शांति सहित नौ ग्रहों की शांति होती है।

Read the rest of this entry »